पूर्वोतत्तर राज्य असम में एनआरसी अधिकारियों ने नागरिकता रजिस्टर में 'गलती' से शामिल हुए 'अयोग्य' लोगों के नामों को हटाने का आदेश जारी किया है। नागरिकता रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए गए डेप्युटी कमिश्नरों और जिला रजिस्ट्रार्स को प्रदेश के एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव शर्मा ने 13 अक्टूबर को एक पत्र लिखा था। अपने पत्र में उन्होंने निर्देश दिया था कि एनआरसी में कुछ 'अयोग्य' लोगों के नाम 'गलती' से शामिल कर लिए गए थे।

इन 'अयोग्य' लोगों में फॉरेन ट्राइब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर दिए गए लोग (DF), चुनाव अधिकारियों द्वारा घोषित संदिग्ध वोटर्स (डीवी) या ऐसे लोग जिनके मामले फॉरेन ट्राइब्यूनल में पेंडिंग हैं तथा उनके उत्तराधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। गौरतलब है कि फॉरेन ट्राइब्यूनल्स (एफटी) एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय है जो फॉरेनर्स ऐक्ट, 1946 के तहत किसी व्यक्ति के अवैध विदेशी अथवा भारतीय नागरिक होने के बारे अपनी राय देता है। ट्राइब्यूनल ऐसे लोगों को नोटिस भी भेजता है, जो डाउटफुल वोटर्स (डी वोटर्स) हैं और जिनके बारे में बॉर्डर पुलिस ने निर्देशित किया होता है।

बीते साल 10 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने लोकसभा को बताया था कि केवल चार विदेशी घोषित किए गए लोगों को अब तक बांग्ला देश भेजा गया है, जबकि एक लाख 29 हजार 9 लोग ऐसे हैं, जिन्हें फॉरेन ट्राइब्यूनल ने अब तक अवैध विदेशी घोषित किया गया है। नियमों के मुताबिक, ऐसे लोगों को एनआरसी की लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सकता है। सरमा ने एनआरसी के जिला अधिकारियों से ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके नाम लिस्ट से बाहर करने के लिए लिखित आदेश देने को कहा है।

सरमा ने बताया कि अभी लिस्ट से नाम हटाए जाने वाले लोगों की संख्या की गणना मुश्किल है। हमने घोषित विदेशियों के नाम लिस्ट से डिलीट करना शुरू कर दिया है। इनमें डिक्लेअर्ड फॉरेनर्स (डीएफ), डाउटफुल वोटर्स (डीएफ) और ऐसे लोग जिनका केस फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में पेंडिंग है, शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सभी जिलों से ऐसी सूचियों का आना अभी शुरू हुआ है, ऐसे में अभी यह बताना मुश्किल है कि कितने लोगों का नाम प्रक्रिया में लिस्ट से हटाया जाएगा।