असम में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मची है। राज्य के 24 जिलों में करीब 13 लाख लोग अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 70 लोगों की जान गई है। इनमें 44 लोगों की बाढ़ में जबकि 26 की मौत भूस्खलन में हुई है। धीमाजी, लखीमपुर, विश्वनाथ, सोनितपुर, उदलगुरी, दरांग, बक्सा, नलबारी, बारपेटा, चिरांग, बोंगाईगांव, कोकराझार, धुबरी, गोलपारा, कामरूप, मोरीगांव, नौगांव, पश्चिमी कार्बी आंगलांग, गोलघाट, जोरहाट, माजुली, शिवसागर, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में 12.97 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीव बेहाल हैं। यहां 223 शिविरों में से 126 प्रभावित हुए हैं। पबित्रा वन्यजीव अभ्यारण्य में 25 में से 24 तथा राजीव गांधी ओरांग राष्ट्रीय उद्यान में 40 में से 28 शिविर प्रभावित हुए हैं। यहां पर अधिकांश वन्यजीवों को पानी से बाहर ठिकाना नहीं मिल रहा है तो वे अपना पानी में खड़े रहकर मदद का इंतजार कर रहे हैं तो कई खुद ही सुरक्षित स्थान ढूंढते नजर आ रहे हैं।

कंडोलीमारी गांव में बाढ़ के पानी से बचने के लिए एक टाइगर बकरी के शेड में छिप गया। उसे निकालने के लिए वन विभाग को 11 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद टाइगर को निकाला जा सका। बाढ़ से अब तक 41 वन्य जीव मारे गए हैं जबकि 49 अन्य को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बचा लिया गया। वन्यजीवों को रेस्क्यू कराने का काम जारी है। वन्यजीवों को पानी से बाहर जहां रास्ता नजर आ रहा है वे जा रहे हैं।

नैशनल पार्क में पानी भर जाने से एक गेंडा पानी में पूरी तरह डूब गया। जान बचाने के लिए वह पानी में तैरकर बाहर निकलने लगा। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो गेंडा एक अच्छा तैराक होता है। वह 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकता है। काजीरंगा में पानी भरने के बाद जब हाथियों को जगह नहीं मिली तो वह सड़क पार करके दूसरी तरफ नजर आ रहे सूखे स्थान की तरफ चल दिए। ऐसे ही हाथियों का यह झुंड एनएच 37 पर नजर आया।