असम सरकार के एक कार्य प्रभारी कर्मचारी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, सुप्रीम कोर्ट, गुवाहाटी उच्च न्यायलय और राज्यपाल को चिट्ठी लिख इच्छामृत्यु की मांग की है। दरअसल दुलाल बोरा पिछले 35 साल से सेवाएं दे रहें हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने उनको स्थाई नियुक्त नहीं दी। बोरा अगले साल 30 मई को सेवानिवृत होने वाले हैं। 

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दुलाल बोरा 1987 में नगांव मंडल में मस्टर रोल कार्यकर्ता के रूप में राज्य के लोक निर्माण विभाग में शामिल हुए। वह एक सहायक बने और वर्तमान में उसी संभाग में एक अनुभाग सहायक है, लेकिन उसकी नौकरी अभी तक नियमित नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मैं अभी भी एक कार्य प्रभारी कर्मचारी हूं और अगर मेरे सेवानिवृत्त होने से पहले मेरी नौकरी को नियमित नहीं किया जाता है, तो मैं पेंशन के लिए पात्र नहीं होऊंगा। फिर मैं क्या करूंगा? मेरे पास अपना जीवन समाप्त करने का सिर्फ एक विकल्प रह जाएगा और इसीलिए मैं उच्चतम स्तर पर लोगों से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।

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उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं न्याय के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, सैकड़ों वर्क चार्ज कर्मचारी हैं और अगर मुझे न्याय मिलता है, तो दूसरों को भी मिलेगा। बोरा ने कहा कि वह हर साल अपनी नौकरी नियमित करने के लिए विभाग के पास आवेदन जमा करते रहे हैं। बोरा ने कहा, मुझे याद नहीं कि मैंने पहला आवेदन कब जमा किया था। आखिरी आवेदन 22 अक्टूबर, 2021 को था और इसके जवाब में इस साल 11 मई को विभाग ने मुझे सूचित किया कि मेरी नौकरी को नियमित नहीं किया जाएगा। बोरा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी में गुजरात उच्च न्यायालय के एक आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सरकार को एक तदर्थ कर्मचारी को पेंशन लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, जो 30 साल से अधिक की सेवाओं के बाद सेवानिवृत्त हुआ था।