असम (Assam) के बोगाईगांव जिले की रहने वालीं 60 वर्षीय भारती सरकार (Bharti sarkar) को एक बार फिर भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) साबित करने को कहा गया है। दो साल के अंदर ये दूसरी बार है जब उन्हें भारतीय नागरिकता साबित करने को कहा गया है। उन्हें ये आदेश फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (foreigners tribunal) ने जारी किया है।

मार्च 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनिल (foreigners tribunal) नंबर-1 ने भारती सरकार को भारतीय नागरिक घोषित कर दिया था, लेकिन अब उन्हें फिर से अपनी नागरिकता साबित करने को कहा गया है।

न्यूज एजेंसी ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया है कि उस महिला के खिलाफ दो केस दर्ज हैं, जिन्हें फॉरेनर्स ट्रिब्यून (foreigners tribunal) के पास भेज दिया गया है। बोगाईगांव जिले के मानिकपुर थाने के अंतर्गत जमदोहा गांव में रहने वालीं भारती सरकार को 30 सितंबर को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें 16 नवंबर को अपनी भारतीय नागरिकता (indian citizenship)साबित करने को कहा गया है। उन्हें कहा गया है कि वो ट्रिब्यूनल के सामने पेश होकर साबित करें कि वो अवैध प्रवासी नहीं हैं।

हालांकि, भारती पहले अपनी भारतीय नागरिकता (indian citizenship) साबित कर चुकी हैं। 8 मार्च 2019 को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (foreigners tribunal) ने उनके पक्ष में फैसला दिया था और उन्हें भारतीय नागरिक माना था। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त दिए अपने आदेश में कहा था कि भारती अपनी नागरिकता साबित करने में सक्षम रहीं और कानून के तहत वो 'विदेशी नागरिक' नहीं हैं।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भारती (Bharti)के खिलाफ पहला केस 2002 में और दूसरा केस 2004 में दर्ज किया गया था, जिसे 2010 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के पास भेजा गया था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि किसी गलती की वजह से दोनों मामले अलग-अलग ट्रिब्यूनल के पास चले गए। उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस महिला के संपर्क में है और वो उसे कागजात जमा कराने में मदद कर रहे हैं।