बारिश की तीव्रता, तूफान की दिशा और यहां तक कि ओलावृष्टि का सटीक अनुमान लगाने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में आठ डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम स्थापित करेगा।

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रिपोर्टों के अनुसार, आठ रडार सिस्टम चालू वित्त वर्ष में असम के जोरहाट, गुवाहाटी, धुबरी और तेजपुर, मिजोरम के लेंगपुई और तीन अन्य राज्यों की राजधानियों - इंफाल, कोहिमा और ईटानगर में स्थापित किए जाएंगे। डॉप्लर वेदर रडार काफी ऊंचाई पर लगाया जाता है और इसका एंटीना एक बड़ी बॉल की दिखता है और यह रेडियो तरंगों या रडार बीम्स के इस्तेमाल से बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवाती तूफान की भी जानकारी देता है। 

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डॉप्लर वेदर रडार मौसम की अतिसूक्ष्म तरंगों को भी कैच कर लेता है। इसकी रेडियो तरंगें प्रकाश की गति जितनी तेज चलती हैं और जब वह बारिश या ओलावृष्टि जैसी किसी चीज टकराती हैं तो वापस रडार पर लौटती हैं। मौसम विज्ञानी इन तरंगों की तेजी और उनके लौटने में लगे समय का विशलेषण करते हैं और उसके आधार पर मौसम संबंधी भविष्यवाणी करते हैं।