आईएमए के चिकित्सकों ने कोविड-19 की त्रासदी से जूझ रहे चिकित्सकों व उनके प्रतिष्टानों पर हिंसा करने वालों के विरूद्ध कठोर कानून बनाए जाने की मांग की। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर डीएम को प्रधानमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। चिकित्सकों ने हिंसा के मामले में लंबित याचिकाओं को हल कराने के लिए प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की मांग की।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डा. एके गर्ग ने कहा कि कोविड से लडते हुए इस वर्ष आईएमए के तकरीबन 725 चिकित्सक व लगभग दो हजार मार्डन मेडिसिन के डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की मृत्यु हो गई। कोविड महामारी के दौरान पूरी चिकित्सक बिरादरी कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध में अग्रिम मोर्चे पर जूझता रहा। यहीं नहीं लाखों लोगों को गम्भीर संक्रमण से बचाने में सफल रहे। इसमें सक्रिय चिकित्सकों और फं्रटलाइन कार्यकर्ताओं में अनेकों इस युद्ध में शहीद हो गए। असम में युवा डॉक्टर पर क्रूर हमला और देशभर में महिला डॉक्टरों तथा अनुभवी चिकित्सकों पर हमले चिकित्सकों के बीच मानसिक आघात पैदा कर रहे हैं।

चिकित्सकों ने असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की। कहा कि महामारी के खिलाफ युद्ध में अपनी जान गंवा चुके लोगों की पहचान शहीद के रूप में की जाए। उनके आश्रितों को उनके दरवाजे पर सहायता पहुंचायी जाए। टीकाकरण के खिलाफ बात करने वालों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए और चिकित्सा के सभी विषयों में बहुआयामी उपचार दिशा-निर्देशों के साथ आने के लिए एक अलग शोध प्रकोष्ठ की स्थापना की जाए। चिकित्सकों ने मुंह पर काली पट्टी व काला मास्क लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान डा. सीपी सिंह, ओपी बरनवाल, अभय जैन, अमित अग्रवाल, एचबी सिंह, एसएन पाठक, नीरज त्रिपाठी, एसएन विश्वकर्मा, मीना विश्वकर्मा, सुनील सिंह, जेएस गुप्ता समेत आईएमए के सभी पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।