गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही के एक फैसले में, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के समन्वयक को यह बताने का निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता का नाम इस तथ्य के बावजूद रजिस्टर में कैसे शामिल हो गया कि प्रासंगिक समय पर, उसके खिलाफ कार्यवाही जारी थी।

जस्टिस मनोजीत भुयन और जस्टिस सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने कहा, "असम राज्य समन्वयक, एनआरसी को एक व्यापक हलफनामा दायर करने दीजिए, और आवश्यक विवरणों के साथ स्थितियों को रिकॉर्ड पर लाने दीजिए, जिससे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में ऐसे व्यक्तियों ने जगह बना ली, जो कि अयोग्य थे और कानूनी रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में शामिल होने के दावेदार नहीं थे।"

नालबारी जिले की निवासी रहीमा बेगम द्वारा फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के एक आदेश के खिलाफ, जिसमें उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया था, शुरू की गई कार्यवाही में यह आदेश पारित किया गया।

न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता का नाम एनआरसी में मौजूद था, जबकि उसके खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई थी और पुलिस अधीक्षक (सीमा), नलबाड़ी द्वारा किए गए संदर्भ के आधार पर जारी थी। खंडपीठ ने दृढतापूर्वक कहा, "इस प्रकार नाम डालना कानून के खिलाफ है।"