मिजोरम-असम विदेश पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह मुद्दा दरअसल एक साजिश के तहत बनाया गया है ताकि लोग ऐसे ही लड़ते रहें। नई दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिति की अध्यक्षता करते हुए अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि वह लगातार मिजोरम के मुख्यमंत्री से बात करते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि लेकिन ये जो गंभीर विषय है। असम-मिजोरम, असम-मेघालय, असम-अरुणांचल, ये जो स्टेट बनाये गए थे तो उस समय सीमा लिख देना चाहिए था कि किसकी क्या सीमा है। लेकिन ये साजिश की गई कि ये लोग आपस मे लड़ते रहे। जिसकी वजह से हम लोग आज भी झगड़ रहे हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा- जब मेघालय, नागालैंड और मिजोरम को राज्य बनाये गये थे तब असम को कोई आपत्ति नहीं थी। उस समय यदि 10 किलोमीटर और दे दिया जाता तो कोई बात नहीं होती। लेकिन इसे साजिश के तहत इशू बनाये रखा गया।

आज हम सबके लिए बहुत ही हर्ष का विषय है कि हमने समिति के 10वें प्रतिवेदन को राष्ट्रपति महोदय के पास भेजने की मंजूरी दे दी है।  प्रधानमंत्री ने अनेकों अवसरों व विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी हिन्दी में बोलकर हमारी राजभाषा का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में तकनीकी शिक्षा और औषधीय शिक्षा का भी संपूर्ण अभ्‍यासक्रम राजभाषा में भाषांतरण कराने का काम शुरू किया है और देश के अंदर यह परिवर्तन आने वाला है।

अमित शाह ने आगे कहा कि हम आज़ादी के 75 वें साल में प्रवेश कर रहे हैं, इन 75 साल में हमने लोकतंत्र की जड़ों को गाँव और कस्बों तक पहुंचाया है और लोकतंत्र को हमारा स्वभाव बनाया है। आजादी के 75 वर्ष होने पर हिंदी सम्मेलनों में आजादी के आंदोलन में राजभाषा हिंदी की भूमिका यह थीम होना चाहिए।