बोड़ोलैंड क्षेत्रीय परिषद के चुनाव को नेडा संयोजक और राज्य के प्रभावशाली मंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने रोमांचक बना दिया। बीटीसी के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि राष्ट्रीय दलों ने अपनी पूरा ताकत लगा दी। इसके पहले बीटीसी चुनाव में हाग्रामा मोहिलारी की पार्टी बोड़ोलैंड पीपुल्स पाटी और यूपीपीएल के बीच ही मुकाबला होता था। हाग्रामा को दिसपुर की सत्ता का सहयोग मिलता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका। 

हाग्रामा और डॉ. हिमंत के बीच रिश्ते को लेकर आई खटास के बाद डॉ. हिमंत ने जिस तरह से बीटीसी चुनाव में प्रचार किया, उसने पूरे चुनाव की केमिस्ट्री को बदल दिया। शायद पहली बार हाग्रामा को अपनी सत्ता बचाने के लिए इतना प्रयास करना पड़ रहा है। डॉ. हिमंत के नेतृत्व में भाजपा के आक्रामक प्रचार की वजह से चुनाव प्रचार का स्वरूप ही बदल गया।

डॉ. हिमंत की यही खासियत है। जब वे किसी को चुनौती देते हैं तो पूरी तैयारी के साथ देते हैं। पहली बार पूरे राज्य के लोगों को पता चल पाया कि बीटीसी का अंतिम चुनाव हो रहा है, क्योंकि इसके बाद बीटीसी का बीटीआर बनना तय है। बीटीआर के गठन होने के साथ बोड़ोलैंड की राजनीति बदल जाएगी। लेकिन मानना होगा डॉ. हिमंत की रणनीति से हाग्रामा हिल गए हैं और अपनी सत्ता को बचाने के लिए हर संभव प्रभास कर रहे हैं। 

हिमंत को पता है कि मतदाताओं को कैसे आकर्षित किया जाता है। कभी डांस करते रहे तो कभी कई किमी तक साइकिल यात्रा तो कभी पैदल यात्रा असम की राजनीति में डॉ. हिमंत एक लोकप्रिय चेहरा है। वह व्यक्ति जब सड़क पर उतर जाता है तो स्वाभाविक रूप से सेल्फी लेने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है। सड़क पर चलते हुए जब लोग उन्हें अपने करीब पाते हैं तो लोगों का आकर्षण तो होगा ही। कोरोना के लंबे काल के बाद बीटीसी चुनाव ने लोगों को उत्साहित किया है, इसमें दो राय नहीं है।