हिजाब विवाद पर अल-कायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी द्वारा जारी किए गए वीडियो बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि अल-कायदा शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म पहनने का महत्व कभी नहीं समझेगा।

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स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने पर भारतीय न्यायपालिका के रुख का समर्थन करते हुए सरमा ने कहा कि वे धार्मिक कपड़ों के प्रदर्शन के लिए एक मंच बन जाएंगे। अल-कायदा वीडियो के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, "कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट फैसला दिया कि एक छात्र से ये उम्मीद नहीं है कि वह किसी और कपड़े की जगह हिजाब पहनने।"

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मेघालय के उमियम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि भारतीय मुस्लिम जवाहिरी के आह्वान पर ध्यान नहीं देंगे और हिजाब विषय पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के बाद इस विवाद में खुद को शामिल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के मुस्लिम अदालत के फैसले का अनुपालन करेंगे और देश की शिक्षा प्रणाली के मूल सिद्धांतों का सम्मान करते रहेंगे।

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उन्होंने कहा, "यदि आप हिजाब पहनते हैं, मैं कुछ और पहनूंगा (यह एक विचारधारा बन जाएगा), तो स्कूल और कॉलेज धार्मिक कपड़े और धार्मिक व्यवहार के प्रदर्शन के लिए एक मंच बन जाएंगे। तो, फिर स्कूल और कॉलेज कैसे जारी रह सकते हैं (हिजाब की अनुमति के साथ)? इसलिए यूनिफॉर्म शब्द इसलिए आया ताकि हिंदुओं और मुसलमानों में कोई अंतर न हो। गरीब और अमीर के बीच कोई अंतर नहीं है।"

सरमा ने यह भी कहा कि भारतीय मुसलमान न्यायपालिका के साथ हैं। उन्होंने कहा, "अल-कायदा कभी नहीं समझेगा लेकिन मुझे यकीन है कि भारतीय मुसलमान समझेंगे कि हमें यूनिफॉर्म पहननी है। एक बार जब आप अपना स्कूल और कॉलेज खत्म कर लेते हैं, तो आप अपने घर वापस आ जाते हैं और आप जो भी पहनना चाहते हैं, पहन सकते हैं। मुझे यकीन है कि भारतीय मुसलमान न्यायपालिका के साथ हैं।" 

वीडियो क्लिप में जवाहिरी ने फरवरी की शुरूआत में, अपने कॉलेज में हिजाब का विरोध कर रहे छात्रों के एक समूह का मुकाबला करने के लिए कर्नाटक की छात्रा मुस्कान खान की तारीफ की है।