गौहाटी उच्च न्यायालय ने राज्य के विभिन्न अस्पतालों में गैर कोविड-19 मरीजों को समुचित उपचार से इनकार किए जाने के मामले पर केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मनीष चौधरी की पीठ ने असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को तीन हफ्ते में अपना जवाब देने को कहा है। 

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक हलफनामा भी दिया है जिसमें कहा गया है कि अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के भर्ती होने के चलते गैर कोविड मरीजों को समुचित इलाज से इनकार किया गया। यह याचिका 14 अगस्त को दाखिल की गयी थी। 

इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, असम सरकार और राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को प्रतिवादी बनाया गया है। सैकिया ने अपनी याचिका में कहा है कि आपात स्थिति में भी उपचार के लिए असम के अस्पतालों में भर्ती होने पर कई मरीजों को कोविड-19 नहीं होने का प्रमाणपत्र देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न अस्पतालों द्वारा अपनायी गयी अनुचित नीतियों के कारण हालिया महीनों में सड़क दुर्घटना में घायल हुए कई लोगों की मौत हो गयी।