असम के जालुकबाड़ी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हिमंत बिस्व सरमा का कहना है कि पिछले 10 साल से कभी अपने क्षेत्र में खुद के लिए वोट मांगने नहीं जाता खासकर जब चुनाव में 6 महीने रह जाते है। ये एक तरह का रिचुअल हो गया है। प्रचार के आखिरी दिन सिर्फ कुछ घंटों के लिए जाता हूं, लेकिन बाकी के साढ़े चार साल मेरा वहां के लोगों से मेरा एक आर्गेनिक रिलेशन रहता है। हमेशा टच में रहता हूं।

मैं इस बार भी एक दिन भी प्रचार करने नहीं जाऊंगा। 4 अप्रैल को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 2.30 बजे सिर्फ 1.30 घंटे के लिए जाऊंगा। पहले यहां के लोग मुझे दादा बोलते थे अब मामा बोलने लगे क्योंकि अब उम्र बढ़ गई है। जो दादा बोलते थे उनके बच्चे अब मुझे मामा बोलने लगे। कोविड के समय मैंने खुद से ये तय किया कि मैं भी डॉक्टर लोगों के साथ पीपीई किट पहनकर उसी वार्ड में जाऊंगा जहां डॉक्टर काम करते हैं ताकि उन्हें लगे कि उनके साथ हम खड़े हैं।

उन्होंने कहा, हमारे यहां असम में बीजेपी का चेहरा ही चेहरा है। चेहरे की कमी नहीं। हम तो इतना ही जानते हैं कि समर्पण से पार्टी का काम करो कुछ न कुछ काम तो पार्टी कि तरफ से मिल ही जायेगा।

10 साल पहले मन मे जरूर था कि सीएम बनना चाहिए कुछ करना चाहिए लेकिन पिछले 5 सालों में बिना सीएम बने ही हमने काफी कुछ अपना ख्वाहिश को पूरा कर  लिया है। अब इस डिबेट से कोई फायदा नहीं कि सीएम कौन बने। मेरा काम बीजेपी के लिए 100 सीट लेकर आना है, बीजेपी को ज्यादा सीट जिताना हमारा काम है वो हम कर रहे हैं। जो काम अपने हाथ में नहीं उसपर फिजूल की क्यों सोचें।

असम से सटे बंगाल में बीजेपी भारी वोटो से जीतेगी। मेरी जानकारी के हिसाब से बीजेपी 200 सीट से ज्यादा जीतेगी। आप चुनाव के बाद भी मुझसे बात कीजिये ये सत्य होगा। अमित शाह जी की जो इच्छा थी वो बंगाल विजय के साथ ही पूरा हो जाएगी। पूरा ईस्ट और नार्थ ईस्ट बीजेपी का होगा।