ओड़िशा के बाद अब असम (assam) में भी जग्गा-बलिया की तरह सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों ने जन्म लिया है। दोनों ही बच्चों का सिर आपस में जुड़ा है। इन्हें  अलग करने के लिए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों को जानकारी भी दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी इनकी आयु काफी कम है। करीब पांच से छह महीने इंतजार के बाद ही चिकित्सीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। 

डॉक्टरों को उम्मीद है कि अगले साल जून माह के बाद इन बच्चों का ऑपरेशन हो सकता है। एम्स के वरिष्ठ डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि जग्गा और बलिया की तरह असम में भी एक ऐसा मामला सामने आया है। अभी दोनों बच्चों का वजन 16 किलोग्राम है। उम्र लगभग छह-सात महीने है। जून से ही परिजनों के साथ उनकी बातचीत हो रही है। 

कोरोना महामारी की वजह से अब तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ही उन्होंने बच्चों को देखा है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में चुनौती रक्त आपूर्ति को लेकर होती है क्योंकि 60 से 70 फीसदी तक यह एक से दूसरे में जाती है। जग्गा और बलिया के मामले में भी यह देखने को मिल चुका है। 

उन्होंने बताया कि इन दोनों बच्चों का ऑपरेशन संभव है कि असम के ही किसी मेडिकल कॉलेज में किया जाए लेकिन एम्स के डॉक्टरों की टीम इसकी निगरानी करेगी। ऐसा ही एक मामला दक्षिण अफ्रीका के घाना में भी सामने आया है जहां डॉक्टर दीपक गुप्ता और उनकी टीम ऑपरेशन करने जाएगी।

दरअसल साल 2017 में एम्स के डॉक्टरों ने सिर से जुड़े जग्गा और बलिया को अलग करने के लिए मैराथन सर्जरी की थीं। छह महीने में करीब चार से पांच ऑपरेशन किए गए। इसके बाद दो साल तक दोनों बच्चे एम्स में ही डॉक्टरों की निगरानी में रहे थे। इससे पहले एम्स ने इस तरह का मामला नहीं किया था। अलग अलग विभागों के करीब 100 से भी ज्यादा डॉक्टरों ने इसमें सहभागिता की थी। हालांकि इस उपचार के बाद जग्गा स्वस्थ रहने लगा लेकिन बलिया की तबियत खराब रहने लगी। पिछले साल बलिया की मौत हो गई लेकिन जग्गा अभी भी स्वस्थ है।