गौहाटी उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पूर्वी असम राष्ट्रीय उद्यान के निकट एक क्षेत्र का न्यायिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है। यहां स्थित कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की एक इकाई पर पर्यावरण कानून का उल्लंघन कर खनन कार्य करने के आरोप लगे हैं। 

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मुख्य न्यायाधीश आर.एम. छाया और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने तिनसुकिया जिला न्यायाधीश को देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान, वर्षावन के पास टिकटॉक एक्सटेंशन ओपन कास्ट प्रोजेक्ट का अध्ययन करने एवं कार्यवाहियों को रिकॉर्ड करने का निर्देश दिया तथा कहा कि यह पता लगाएं कि कोई खनन हो रहा है या नहीं, और यदि हां, तो किसके माध्यम से व किसके द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 231.65 वर्ग किमी. तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों के राष्ट्रीय उद्यान को जून 2021 में अधिसूचित किया गया था। 

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गौरतलब है कि 937 वर्ग किमी के देहिंग पटकाई हाथी अभ्यारण्य का हिस्सा है, जिसमें तिनसुकिया जिला के लेडो-मार्गेरिटा क्षेत्रों, तेल रिफाइनरी शहर डिगबोई और कई चाय बागानों में ब्रिटिश युग की कोयला खदानें शामिल हैं। अदालत ने यह आदेश जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया। इन याचिकाओं में टिकटॉक और सालेकी प्रस्तावित रिजर्व फॉरेस्ट में ओपन कास्ट माइनिंग के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ की अप्रैल 2020 की मंजूरी को चुनौती दी गई है। बोर्ड ने सिफारिश की थी कि 98.59 हेक्टेयर सलेकी में से 57.20 हेक्टेयर में खनन को पहले ही सीआईएल इकाई, नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एनईसी) द्वारा तोड़ा जा चुका है। विक्रम राजखोवा के साथ एक जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता शांतनु बोर्थाकुर ने बताया कि उनकी याचिका में देहिंग पटकाई को ( पूर्व के अमेन’ के रूप में जाना जाता है,) जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत एक विरासत स्थल के रूप में घोषित करने की मांग की गई है। 

याचिकाकर्ताओं के एक अन्य समूह के लिए बहस करते हुए, अधिवक्ता देबजीत के. दास और एच. बेताला ने खनन कार्यों में शामिल विभिन्न विभागों के परस्पर विरोधी रुख को रेखांकित किया। अदालत ने जिला न्यायाधीश को ‘याचिका में उल्लिखित’ क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया कि क्या रिकॉर्ड पर जगह पर कोई खनन हो रहा है। इसके साथ ही अदालत ने असम सरकार को आदेश दिया कि वह न्यायाधीश के टिकटॉक क्षेत्र में कोयला खनन स्थलों का निरीक्षण करने की व्यवस्था करे। उच्च न्यायालय ने इस मामले में जिला जज को सुनवाई की अगली तारीख एक नवंबर को या उससे पहले रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।