पूर्वोत्तर राज्य असम इस वक्त भीषण बाढ़ का कहर झेल रहा है। बाढ़ से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 7.19 लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच कांग्रेस ने केंद्र पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के तहत असम को सहायता से वंचित करने का आरोप लगाया है।

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असम पीसीसी मीडिया विभाग के अध्यक्ष मनजीत महंत ने आरोप लगाया कि एनडीआरएफ के तहत जहां गुजरात को 2021-22 में 1,000 करोड़ रुपये मिले, वहीं असम को एक पैसा भी नहीं मिला। बीजेपी शासन के दौरान 2018-19 और 2019-20 में केंद्र ने असम को कुछ भी आवंटित नहीं किया। 2020-21 में  असम को सिर्फ 44.37 करोड़ रुपये मिले। वहीं NDRF के तहत 2021-22 में गुजरात को 1,000 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 701 करोड़ रुपये, ओडिशा को 500 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 300 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 213.51 करोड़ रुपये, झारखंड को 200 करोड़ रुपये और कर्नाटक को 629.03 करोड़ रुपये मिले, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने असम को एक पैसा भी नहीं दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या मोदी सरकार की 'असमानता' का समर्थन करने के लिए सीएम के पास कोई तर्क है।

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महंत ने राज्य सरकार पर निर्माणाधीन तटबंधों को समय पर पूरा नहीं कर बाढ़ प्रभावित राज्य को आपदा के कगार पर धकेलने का भी आरोप लगाया। राज्य सरकार की गलत नीतियों और पक्षपात के कारण पिछले दो वर्षों में 1,728.55 करोड़ रुपये की 477 योजनाएं अधूरी हैं। 2020-21 में 565.44 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू की गई 210 योजनाओं का अस्सी प्रतिशत काम अभी पूरा होना बाकी है। वहीं दूसरी ओर 1,163.12 करोड़ रुपये की अन्य 267 योजनाओं पर भी काम अधूरा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तटबंध निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू करने में विफल रही जब बाढ़ का पानी कम हुआ। राज्य पीसीसी ने वर्तमान बाढ़ की स्थिति का क्षेत्र अध्ययन करने के लिए तीन समितियों का गठन किया है। समितियों के अध्यक्ष तीन कांग्रेस विधायक, नूरुल हुड्डा, बसंत दास और वाजेद अली चौधरी हैं।