असम में बाढ़ का कहर जारी है। तिनसुकिया में क्षेत्र में भारी वर्षा और बाढ़ के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों के मकान पानी में डूब गए हैं। सड़कों और रास्तों पर भारी पानी भरा हुआ है। असम में बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हो गए हैं और 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो बाढ़ग्रस्त असम में राहत कार्यों के लिए भारत सरकार की मदद करने के लिए तैयार है। 

बाढ़ की मार जानवरों पर भी पड़ी है। काजीरंगा नेशनल पार्क में मरने वाले जानवरों की संख्या 116 पहुंच गई है। इनमें से 88 हिरन और 11 गैंडा हैं। 143 जानवरों को बचाया जा चुका है। 

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमारे मानवीय कार्यों के लिए हमारे सहयोगियों ने बताया है कि भारत में असम और पड़ोसी देश नेपाल में मानसून की बारिश के कारण आई बाढ़ के कारण करीब 40 लाख लोग बेघर हो गए हैं और 189 लोगों की जान गई है।

उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र जरूरत पड़ने पर भारत सरकार की मदद को तैयार है। उन्होंने कहा कि नेपाल प्राधिकारियों ने तराई क्षेत्र के निचले इलाकों तथा नदी के तट पर रहने वाले लोगों से बाढ़ के खतरे के कारण सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। दुजारिक ने कहा, प्रभावित इलाकों में पहुंच पाना एक बड़ी समस्या है। दूर-दराज के इलाकों में भूस्खलन होने के कारण राहत एवं तलाश अभियान बाधित हो रहे हैं।