सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की कवायद पर सवाल उठाया गया है। 

इस याचिका में कहा गया है कि यह परिसीमन 2001 की जनसंख्या के आधार पर किया जा रहा है, जो कि बहुत पुराने आंकड़े हैं। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई के बाद केंद्र और असम सरकार को इस याचिका पर नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

असम के नेता मौलाना बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) द्वारा यह याचिका दायर की गई थी।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में एआईयूडीएफ ने वर्तमान में कोरोना महामारी के दुष्परिणाम को लेकर फिलहाल परिसीमन की कवायद को स्थगित करने की मांग की है। एआईयूडीएफ का कहना है कि जनगणना 2021 की कवायद जब चल रही है तब ऐसे में जनगणना 2001 के आधार पर यह क्‍यों किया जा रहा है।

इस याचिका में 28 फरवरी 2020 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें 8 फरवरी 2008 की एक पूर्व अधिसूचना को रद्द कर दिया था। इसी आदेश के तहत राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई के बाद केंद्र और असम सरकार को इस याचिका पर नोटिस जारी किया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि असम में परिसीमन की लंबित प्रक्रिया का संचालन करने का निर्णय न केवल एक मनमाना और जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है, बल्कि जिस पुरानी जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव रखा गया है, वह बिल्कुल सरकार की सोच के विपरीत है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि नागरिकता अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद से राज्य में व्यापक हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। सरकार परिसीमन के जरिए राज्य में नागरिकता कानून की नई परिभाषा देना चाहती है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित परिसीमन से निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव होगा और बड़ी संख्या में मतदाताओं और उम्मीदवारों के मतदान के अधिकार और वरीयताओं पर प्रभाव पड़ेगा।

याचिका में यह भी निर्देश दिया गया है कि राज्य में परिसीमन को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जाए जब तक कि राज्य में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) की कवायद पूरी न हो जाए। साथ ही याचिका में यह दावा किया गया है कि चूंकि प्रस्तावित परिसीमन में प्रयोग किया जाने वाला जनसंख्या का आंकड़ा काफी पुराना है और वर्तमान में राज्य में माहौल इस अभ्यास के लिए अनुकूल नहीं है।

ऐसे में यह आशंका है कि यदि वर्तमान में अभ्यास किया जाता है, तो काफी सारे नागरिक मतदान के लिए अपने अधिकार को खो देंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने एआईयूडीएफ की याचिका को पहले की याचिका के साथ टैग किया था, जिसमें उसने केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया था। पहले की याचिका में मांग की गई थी कि राज्य में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को जनगणना 2021 के पूरा होने तक टाल दिया जाए।