कोरोना के कहर के कारण हर देश संभव कदम उठा रहा है। इसी के साथ ज्यादा लोगों को एक साथ इकट्ठा नहीं होने के सख्त आदेश दिए हैं। लेकिन इसी बीच अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने COVID-19 के प्रसार पर चिंताओं के कारण असम में 'विदेशियों' के रूप में हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई पर भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।


इसी के लिए USCIRF के चेयरमैन टोनी पर्किन्स ने कहा कि हम पहली ही बार में इस फैसले का स्वागत करते हैं। जस्टिस फॉर लिबर्टी इनिशिएटिव द्वारा प्रस्तुत एक आवेदन पर, सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम दो साल के लिए बंदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया और सुरक्षित बांड को 1,00,000 से 5,000 रुपये तक जारी करने के लिए आवश्यक व्यक्तिगत बांड राशि को कम कर दिया गया है। बता दें कि पर्किंस ने सर्वोच्च न्यायालय से मानवीय आधार पर हिरासत में रखे गए सभी लोगों की रिहाई का आदेश देने का आग्रह किया था।


उन्होंने कहा कि हिरासत केंद्रों को कोविड-19 के प्रसार के लिए प्रजनन केंद्र बनने का खतरा हो सकता है। USCIRF ने दावा किया कि 'विदेशी' होने के संदेह में लगभग 1,000 लोग वर्तमान में असम में छह निरोध केंद्रों में कैद हैं । इसी के साथ कुछ व्यक्तियों को किसी अपराध के लिए सजा सुनाए बिना 10 साल तक हिरासत में रखा गया है। लेकिन अभी कोरोना के खतरे के कारण भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हिरासत केंद्रों में बंदियों की भेद्यता को मान्यता दे दी है।