तैंतीस वर्षीय तारा सिंह जो सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे, उनमें संक्रमण के कोई लक्षण न दिखने के बाद घर में ही आईसोलेट किया गया था। हालांकि, असम के जोरहाट जिले में सिनामारा टी एस्टेट के इस कर्मचारी के लिए यह होम आईसोलेशन शाम को ही अचानक समाप्त हो गया क्योंकि उनकी हालत बिगड़ने लगी और उन्हें पास के एक अस्पताल में ले जाना पड़ा। सिंह और एक ही चाय के बागान में काम करने वाले उनके जैसे 14 और लोगों के लिए होम आईसोलेशन बहुत बड़ी गलती साबित हुआ।

बागान में मलेरिया मजदूर का काम करने वाले तारा सिंह ने कहा, "अस्पताल के वॉर्ड में हम नौ लोग थे। जब बागान के प्रशासन ने मुझे कोविड टेस्ट कराने के सलाह दी उस समय मुझे बुखान और खांसी थी। मैं संक्रमित पाया गया और फिर उन लोगों ने मुझे घर पर ही आईसोलेट रहने की सलाह दी। लेबर क्वाटर्स में मुश्किल से दो कमरे और बाथरूम होता है वो भी बहुत कम दूरी पर। कई मामलों में आज भी लोग खुले में शौच करते हैं। हर परिवार एक दूसरे से किसी भी तरह से जुड़ा रहता है और अधिकतर संयुक्त परिवार होने के चलते काफी ज्यादा लोग भी होते हैं। मैंने दोपहर में खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, हालांकि शाम तक मुझे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बुखार अभी भी है लेकिन मैं ठीक हो रहा हूं। वह मुझे नियमित तौर पर भोजन और दवाएं दे रहे हैं।"

असम टी कॉरपोरेशन लिमिटेड के स्वामित्व वाले सिनामारा टी एस्टेट में करीब 2,500 लोग काम करते हैं और यहां 6000 से अधिक की आबादी है। 10 मई को बागान में काम करने वाले 19 महिला और पुरुष कर्मचारी कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे जिसके बाद उन्हें कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए घर में आईसोलेट रहने की सलाह दी गई थी। हालांकि बागान में मजदूरी करने वाले कामगारों का 8*8 का क्वार्टर कोविड-19 मरीजों के आईसोलेशन की जरूरतों के हिसाब से खरा नहीं उतरता है।

जोरहाट से भाजपा सांसद कामाख्या प्रसाद तस्सा ने कहा कि "मैं चाय के बागानों में बढ़ रहे कोरोना मामलों को लेकर चिंतित हूं और यह हमें किसी बड़ी तबाही की ओर ले जा सकता है। इससे पहले गेस्ट्रोएंटरिटीज के मामले में प्रभाव बहुत गंभीर साबित हुआ था। ज्यादा जनसंख्या, रहने की जगह की कमी और आईसोलेशन सुविधाओं का न होना और टी गार्डन के खाली अस्पताल परेशानियों में और इजाफा करते हैं। इसके लिए तत्काल प्रभाव से जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। मैं इस बात से आश्वस्त नहीं हूं कि सिनामारा में वायरस नहीं फैलेगा क्योंकि कई संक्रमित लोगों को घर जाने की इजाजत दे दी गई है। अगर ऐसा कई और बागानों में होता है तो परिस्थिति हाथ से निकल जाएगी। मैंने जोरहाट के डिप्टी कमिश्नर और स्वास्थ्य के संयुक्त निदेशक को इसकी जानकारी दी है। मैं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से यह अपील करना चाहूंगा कि वह इस संबंध में विशेष कदम उठाएं। चाय बागानों के अधिकतर अस्पतालों में कोविड केयर सुविधाएं नहीं हैं। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, मैं असम के किसी भी टी गार्डन में कोविड केयर सुविधा से संतुष्ट नहीं हूं।"

इस बीच, 14 मई को तिनसुकिया जिले के बिसाखुपी टी एस्टेट के चाय के बागान में काम करने वाले 11 कामगार संक्रमित पाए गए थे, बदला भेटा टी एस्टेट में तीन कर्मी संक्रमित मिले थे। ये संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। बागानों में कर्मियों की पंक्तियां कंटेनमेंट जोन में तब्दील होती जा रही हैं। असम के चाय बागान में अब तक करीब 1000 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। जबकि इससे जान गंवाने वालों की संख्या अभी चार से पांच है। पिछले सप्ताह डिब्रूगढ़ के जालोनी टी एस्टेट के 193 कर्मचारी, जिसमें उनके परिवार और मैनेजमेंट के कुछ लोग भी शामिल थे। कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। मैजान टी एस्टेट में 66 लोग संक्रमित पाए गए थे। इसी तरह बिस्वनाथ जिले में 46 कर्मी संक्रमित पाए गए थे।