कोरोना वायरस यानी कि COVID-19 से दुनिया में भारी नुकसान हुआ है। आर्थिक में तो मंदी आई ही है इसी के साथ कई तरह का और भी भारी नुकसान हुआ है लेकिन कई जगहों पर कोरोना एक तरह से वरदान साबित हुआ है। वैसे तो कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन में सारे काम-धंधे व्यापर सब ठप हो गए हैं। जिसकी एक झलक असम के मत्स्य क्षेत्र में देखने को मिली है। बता दें कि असम के मत्स्य क्षेत्र से जुड़े करीब 2,43,000 लोग हैं, इस क्षेत्र में अब तक लगभग 160 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


मत्स्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने इस नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान चिकित्सा आपातकाल के कारण राज्य भर में 1,361 थोक व्यापारी, 16,748 खुदरा विक्रेता, 12,923 विक्रेता, 1,15,677 मछुआरे और मछली श्रमिक, 408 मछली बीज हैचरी के मालिक और 4,799 मछली उत्पादक बहुत ही बुरे ढंग से प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन के कारण से न केवल पूरे मछली विपणन चैनल को अव्यवस्थित हो गया, बल्कि मछली विपणन के अंतर-जिला और अंतर-राज्य आयात-निर्यात गतिविधियां भी बाधित हो गईं हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि मत्स्य विभाग ने COVID-19 प्रोटोकॉल के अनुपालन में मत्स्य पालन,जिला मत्स्य पालन और स्थानीय जिला प्रशासन निदेशालय को शामिल करके लॉकडाउन अवधि के दौरान आम लोगों को ताजा मछली की आपूर्ति के लिए एक योजना तैयार की है जो कि अच्छा परिणाम दिखा रही है और सभी के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। बता दें कि योजना के तहत, राज्य में अब तक 170 टन से अधिक मछली की बिक्री 8 करोड़ रुपये के कुल मूल्य के साथ की गई, जो लगभग 50,000 थोक विक्रेताओं द्वारा बहुत कम मार्जिन के साथ 7,000 स्थानीय मछली किसानों द्वारा प्राप्त की गई थी।