पुलिबर देवगांव जोरहट (असम) के 35 वर्षीय प्रांजू मोहन बरुअह की कोरोना से मौत हो गई। वह निजी कंपनी में इंजीनियर थे और खजराना क्षेत्र में रहते थे। रविवार को पुलिस ने प्रांजू का अंतिम संस्कार करवाया। लॉकडाउन के कारण पत्नी-बेटे नहीं आ पाए तो वीडियो कॉल पर अंत्येष्टि दिखाई।

खजराना थाना टीआइ दिनेश वर्मा के मुताबिक प्रांजू स्कीम-134 में किराया से रहते थे। कंपनी हेड आशीष गुप्ता ने पुलिस को बताया प्रांजू के फैंफड़ों में 75 प्रतिशत तक संक्रमण फैल गया था। रविवार को उनकी सांसे रुक गई तो हमने खुब प्रयास किया। अस्पताल ले जाने का प्रयास किया लेकिन डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस और निगमकर्मी भी पहुंच गए।

वर्तमान हालातों को देखते हुए परिजनों ने इंदौर आने में असमर्थता बताई। साथी उनका शव असम नहीं लेजा सकते थे। रात को इंदौर में अंतिम संस्कार करना तय किया और अंत्येष्टि कर वीडियो कॉलिंग कर उन्हें बताया। इसके पूर्व एएसपी (पश्चिम-2) डॉक्टर प्रशांत चौबे ने चाइना की बैंक में अफसर रहे मनोज कुमार शर्मा का अंतिम संस्कार करवाया था। उनकी पत्नी विनीला बेटे मिराज के साथ चाइना थी।

फिरोजाबाद के समीप एक गांव में रहने वाले सत्यपालसिंह यादव एक लॉज में फंस गए। जनता कर्फ्यू के कारण न गांव जा पा रहे थे न खाने के लिए रुपये बचे। सूचना मिलते ही सत्यकॉम वालिंटियर पहुंचे और यादव को खाना खिलाया। टिकिट और रुपये देकर उन्हें गांव रवाना कर दिया। एएसपी (पश्चिम-2) डॉ.प्रशांत चौबे के मुताबिक यादव फेरी लगाकर चूड़ियों बेचते है। जनता कर्फ्यू के पहले वह खरीदारी करने इंदौर आए थे और रानीपुरा स्थित एक लॉज में ठहरे हुए थे। घर लाए रुपयों से कुछ दिनों तक काम चलता रहे लेकिन रुपये खत्म होने पर खाने की व्यवस्था नहीं हुई। सूचना मिलने पर वालिंटियर पूनम गोयल पहुंचे और खाना खिलाया।