गुवाहाटी। असम सरकार, मेघालय के साथ 50 साल पुराना सीमा विवाद (Assam-Meghalaya border dispute) खत्म करने जा रही है। जिसमें दोनों राज्यों के बीच विवादित क्षेत्र की जमीन आधी-आधी बांटने पर सहमति बनी है। जिसके विरोध में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सड़क पर उतर आई है। कांग्रेस का आरोप है कि विरोधी दलों की आवाज को दबाकर असम सरकार (Assam Government) मेघालय को 45 लाख बीघा भूमि स्थानांतरित करने जा रही है, जिसे कांग्रेस देने नहीं देगी। 

साथ ही कांग्रेस ने भाजपा के भी संग्रामी खून वाले नेता, कर्मी कांग्रेस के साथ असम की भूमि को बचाने की इस मुहिम में कांग्रेस के साथ आने की अपील की है। ये बातें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा (State Congress President Bhupen Kumar Bora) ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन (State Congress Headquarters Rajiv Bhawan) परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान कही। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वदलीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा (Chief Minister Dr. Himanta Biswa Sarma) अपनी मर्जी विरोधी दलों के नेताओं पर थोपते रहे, जिसे कांग्रेस के नेता कभी भी नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक के दौरान कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र (special session of the assembly) बुलाने की मांग की थी। लेकिन, मुख्यमंत्री ने इसे अनसुना करते हुए मेघालय को असम की जमीन देने जा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगया कि यदि सरकार 45 लाख बीघा भूमि (45 lakh bigha land) मेघालय को दे देती है तो असम का पिलिंगकांटा और बोको आदि इलाका मेघालय में चला जाएगा, कांग्रेस जिसे कभी जाने नहीं देगी। बता दें कि भाजपा सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ता राजीव भवन से दिसपुर तक शांतिपूर्ण-प्रदर्शन करने के लिए निकले लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राजीव भवन परिसर में ही पुलिस ने रोक दिया।

बोरा ने कहा कि कांग्रेस कभी भी असम का इतना बड़ा नुकसान होने नहीं देगी। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि सरकार के इस सिद्धांत के विरुद्ध आवाज उठाएं और कांग्रेस के साथ इस आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि असम-मेघालय सीमा समझौता के नाम पर असम की जमीन मेघालय को देने की बात किसी भी कीमत पर मानी नहीं जाएगी।

प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए सुरक्षाबलों ने कांग्रेस के एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्य सचिव से मिलने की अनुमति दी। इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता एवं कार्यकर्ता सुबह से ही राजीव भवन में जमा हो रहे थे। लेकिन सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की वजह से प्रदर्शनकारियों को बाहर निकल नहीं पाए। प्रदर्शनकारी इस दौरान बीजेपी सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी करते नजर आए।