कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा (Ripun Bora) ने रविवार को हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) पर निशाना साधते हुए हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कड़वाहट पैदा करने के लिए लेफ्ट और लिबरल को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। रिपुन बोरा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री अल्पसंख्यकों के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं और राज्य का ध्रुवीकरण कर रहे हैं।

रिपुन बोरा ने कहा कि जहां तक ​​असम का सवाल है, हिमंत बिस्व सरमा हमारे अब तक के सबसे सांप्रदायिक मुख्यमंत्री हैं। खासकर मुख्यमंत्री बनने के बाद जीवन के हर क्षेत्र में वो सांप्रदायिक राजनीति और नफरत की राजनीति कर रहे हैं। वो अल्पसंख्यकों के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं और हर जगह ध्रुवीकरण कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले मैं असम के मुख्यमंत्री से इतिहास को बहुत ध्यान से पढ़ने और देश और लोगों को गुमराह करने के लिए इतिहास को फिर से लिखने का व्यर्थ प्रयास नहीं करने का अनुरोध करता हूं। असम के मुख्यमंत्री ने पहले आरोप लगाया था कि वामपंथी और उदारवादी हिंदू-मुसलमान के बीच कड़वाहट के लिए जिम्मेदार हैं। कांग्रेस ने इसे वोट बैंक के लिए बढ़ाया।

साथ ही सरमा ने कहा कि आजादी के बाद वाम-उदारवादियों ने भारत के अकादमिक पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया जो विद्रोहियों को पैदा करता है और हमें लड़ने के लिए प्रेरित करता है। वो लोगों के दिमाग से राज्य के सम्मान को खत्म करने के तरीकों की तलाश करते हैं। वहीं नगालैंड में सेना के अधिकारियों की तरफ से कथित हत्याओं की घटना की निंदा करते हुए रिपुन बोरा ने कहा कि निर्दोष नागरिक मारे गए।

ये एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, मैं इसकी निंदा करता हूं और नगालैंड के सभी वर्गों के लोगों से इस समय शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। शनिवार को मोन जिले के ओटिंग गांव में कुछ नागा युवकों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। उन पर सुरक्षाबलों की ओर से कथित रूप से गोलीबारी की गई थी, जिन्हें उनके आतंकवादी होने का संदेह था।

वहीं नगालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी ने 4 दिसंबर की शाम को मोन जिले के अंतर्गत ओटिंग और तिरु गांव के बीच एक बिंदु पर ग्रामीणों पर गोलीबारी की घटना की निंदा की है। राजभवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि एसआईटी इस घटना की हर एंगल से जांच करेगी।