कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक और राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि कश्मीर से लेकर असम तक कांग्रेस खतरनाक खेल खेलती रही है।

नेडा संयोजक ने कहा कि कश्मीर में गुपकर गिरोह तथा असम में एआईयूडीएफ के सांप्रदायिक एजेंडे का समर्थन कर कांग्रेस सांप्रदायिक और अलगाववादी राजनीति को बढ़ावा देने का काम कर रही है। मंत्री हिमंत ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली पार्टी होकर अब देशहित के खिलाफ काम कर रही है।

उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए कहा कि सन 1974 से ही वे कश्मीर के प्रसंग पर कट्दरवादी स्थिति निभाते आए हैं। ठीक उसी तरह महबूबा मुफ्ती का बयान कि 'अगर गुपकर अलायंस सत्ता में आती है तो कश्मीर में धारा 370 और 35 (ए) को फिर से लागू करेंगे! से यह साबित करती है कि देश के संविधान के प्रति उनका कोई भरोसा ही नहीं है। महबूबा मुफ्ती के उस बयान की भी हिमंत ने आलोचना की जिसमें उन्होंने (महबूबा) कहा था कि जब तक कश्मीर में धारा 370 और 35 (ए) फिर से लागू नहीं होता है तब तक वो तिरंगा नहीं फहराएंगी।

कश्मीर के इन दोनों नेताओं की कारगुजारियों को गिनाते हुए हिमंत ने कहा कि गुपकर अलायंस में शामिल होकर कांग्रेस ने भारतीय संविधान पर भरोसा न होने की सच्चाई साबित कर दी है। कांग्रेस न केवल कश्मीर में अलगाववादी ताकतों के साथ खड़ी है बल्कि असम और जम्मू-कश्मीर में शांति भंग भी कर रही है। आजादी की लड़ाई लड़नेवाले यह पार्टी अपने आदर्श से भटक गई है। 

उन्होंने कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह से पूछा कि क्‍या उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना चाहती है? उन्होंने आग्रह किया कि कांग्रेस देशवासियों के समक्ष इस बात पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे कि वह धारा 370 को कश्मीर में फिर से लागू कराने के पक्ष में है? क्या यह पार्टी धर्मनिरपेक्षता और देश की अखंडता पर विश्वास रखती है या नहीं?

हिमंत ने कहा कि पिछले दिनों सिलचर हवाई अड्डे पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। पहले मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने इससे इनकार किया और बाद में उन्होंने मान लिया कि पाकिस्तान जिंदाबाद के ही नारे लगे थे। उन्होंने पूछा कि इसके लिए कांग्रेस ने अजमल की जगह मेरे खिलाफ केस क्‍यों दर्ज किया? इसका मतलब साफ है कि फारुक अब्दुल्ला की तुलना में कांग्रेस अधिक अलगाववादी है। कांग्रेस असम में सांप्रदायिक एजेंडा और कश्मीर में अलगाववादी एजेंडा खेल रही है।