कोच-राजबंशी संग्राम समिति (KRSS) ने कोच-राजबंशी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने के संबंध में दिए गए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के बयान का कड़ा विरोध किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि "अगर कोच-राजबोंगशी समुदाय को एसटी का दर्जा दिया जाता है तो अन्य समुदाय इसका विरोध करेंगे "।

सीएण के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, KRSS केंद्रीय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष रूपज्योति दत्ता (Rupjyoti Dutta) ने कहा कि "कोच राजबोंगशी समुदाय (Rajbongshi community) वर्ष 1967 से ST के रूप में मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा है। मांग के परिणामस्वरूप, 1996 में प्रधान मंत्री  PV नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान समुदाय को ST का दर्जा दिया गया था।

उन्होंने बताया कि " एक अध्यादेश के माध्यम से कोच राजबंशी को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था, जिसे पहले छह महीनों के पूरा होने के बाद और नवीनीकृत किया गया था। हालांकि, इसी मुद्दे से संबंधित विधेयक को संसद (Parliament) में नहीं लाया गया, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय में कोच राजबंशी समुदाय को ST के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकी।"
रूपज्योति दत्ता (Rupjyoti Dutta) ने कहा कि "कांग्रेस (Congress) की तरह, भाजपा ने 2014 के संसदीय चुनाव के दौरान चुनावी घोषणा पत्र में कोच-राजबोंगशी समुदाय को आदिवासी का दर्जा देने का श्वेत-श्याम वादा किया और सत्ता कायम रखी लेकिन भाजपा सरकार ने समुदाय को एसटी का दर्जा नहीं दिया। इसी तरह, भाजपा ने इसी वादे के साथ 2016 में राज्य में सत्ता हासिल की थी "।

इस प्रकार, भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्व राज्य सरकार ने इस मुद्दे को लंबित रखा। वर्तमान में मुख्यमंत्री का बयान देकर मुद्दे को हमेशा के लिए लम्बित रखने का कार्य दुर्भाग्यपूर्ण है।"