ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के खिलाफ याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और कर्नाटक, असम सहित आठ राज्यों को नोटिस जारी किया। ट्विटर के खिलाफ ये एफआईआर ‘खालिस्तान’ पर कथित तौर पर एक ट्वीट के प्रसार को लेकर की गई हैं। ट्विटर ने अपनी याचिका में इन एफआईआर को रद्द करने की अपील की है।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष ट्विटर इंडिया की ओर पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जन पूवय्या ने कहा कि एक मामले में कई एफआईआर नहीं हो सकतीं। उन्होंने इन प्राथमिकियों को रद्द करने की अपील की। कंपनी ने इन प्राथमिकियों को एक साथ नत्थी करने और उसकी सुनवाई एक निचली अदालत में करने की अपील की। कंपनी ने कहा कि पत्रकार अर्नब गोस्वामी के मामले भी ऐसा किया गया था।

अमेरिकी की ट्विटर इंक की भारतीय इकाई के खिलाफ एक व्यक्ति गुरपतवंत सिंह पन्नूम के ‘खालिस्तान’ पर ट्वीट को लेकर आठ राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई। पन्नूम ने एक ट्विटर पोल ट्वीट किया था कि क्या भारत को ‘खालिस्तान’ को मान्यता देनी चाहिए। इस मामले पर सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई।

मुख्य न्यायाधीस बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना व न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने ट्विटर की याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, कर्नाटक, असम, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।

न्यायालय ने सोशल मीडिया कंपनी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने वाले लोगों से भी जवाब मांगा है। इसके अलावा पीठ ने भाजपा के एक नेता विनीत गोयनका को भी नोटिस जारी किया है। गोयनका ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने कथित ट्वीट के प्रसार के लिए धन लिया है।