असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी ने टी ट्राइब कम्युनिटी को रिझाने के लिए चाय बागानों से सटे क्षेत्रों में शिक्षा के विशाल ढांचे को खड़ा करने का चुनावी वादा किया है। जोरहाट में चाय जनजाति समुदाय इकाई की मीटिंग में राज्य के कैबिनेट मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि समय आ गया है कि इस जनजाति के लोग असम का निवासी होने पर खुद पर गर्व कर सकें।

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, '1 और 2 नवंबर से हम चाय बागानों के क्षेत्रों में 119 हाईस्कूलों की बिल्डिंग के निर्माण कार्यों को शुरू करने जा रहे हैं। ये इस जनजाति की लंबे समय से मांग थी और हम इसे पूरा करेंगे। हर स्कूल की लागत करीब 1.5 करोड़ होगी। राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट पर 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। हम चाय जनजाति को सशक्त करना चाहते हैं।'

असम सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि चाय बागान क्षेत्र से आने वाले छात्रों को राज्य के सरकारी कॉलेजों में 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा। हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'ये देखकर बुरा लगता है कि आजादी के 70 साल बाद भी चाय बागान से जुड़े इलाकों में सड़कें नहीं हैं, हाईस्कूल नहीं हैं। महिलाओं का बैंक अकाउंट नहीं है। अब 7 लाख चाय बागान के मजदूरों का जनधन योजना के तहत खाता खोला गया है।'

बता दें कि 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए अगले साल मार्च-अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। 2016 में हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। वर्तमान में बीजेपी के 60 विधायक हैं। असोम गण परिषद (AGP) के 14 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के 12 विधायकों के समर्थन से बीजेपी ने सरकार बनाई है। एक निर्दलीय विधायक ने भी बीजेपी को समर्थन दिया है। वहीं कांग्रेस के पास 23 और AIUDF के पास 14 विधायक हैं।