बिहार चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ी ताकत दी है और माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने में बिहार के नतीजे काफी अहम साबित होंगे। भाजपा का जोरदार प्रदर्शन पश्चिम बंगाल और असम के लिए बड़ा टॉनिक साबित होगा। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पूरी ताकत लगा रखी है पार्टी के रणनीतिकारों को बिहार के नतीजों ने उत्साहित कर दिया है। माना जा रहा है कि अब पार्टी का पूरा फोकस पश्चिम बंगाल पर होगा और अब पार्टी जोरदार ढंग से ममता सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकेगी।

बिहार के नतीजों के बाद जहां भाजपा की नजर अब पश्चिम बंगाल पर टिक गई है वहीं यह भी माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष की रणनीति में भी बदलाव आ सकता है। पश्चिम बंगाल में बड़ा सवाल यह होगा कि क्या ममता के साथ अब लेफ्ट और कांग्रेस हाथ मिला सकते हैं। भाजपा में इस बात पर भी मंथन होगा कि क्या बिहार के बाद भाजपा ध्रुवीकरण और पीएम मोदी की कल्याणकारी योजनाओं के दम पर ममता का किला ध्वस्त कर पाएगी या नहीं।

वैसे पीएम मोदी की कई योजनाओं को ममता ने बंगाल में मंजूरी नहीं दी है और भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। पार्टी के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पिछले बंगाल दौरे में पीएम की कल्याणकारी योजनाएं रोकने पर ममता बनर्जी को घेरा था और कहा था कि अब बंगाल ज्यादा दिनों तक इन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा क्योंकि भाजपा ममता को सत्ता से बेदखल कर देगी।

असम में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। मौजूदा समय में राज्य में भाजपा की सरकार है और भाजपा अगले चुनाव में भी सत्ता अपने पास बनाए रखने की कोशिशों में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि बिहार के नतीजे असम को भी प्रभावित करेंगे। केरल में भाजपा ज्यादा बड़ी ताकत नहीं है मगर सियासी जानकारों का कहना है कि अगर ध्रुवीकरण का फार्मूला कारगर हुआ तो इसका असर केरल तक में देखने को मिल सकता है। तमिलनाडु में डीएमके और एआईडीएमके दोनों पार्टियां अब पहले की तरह मजबूत नहीं रह गई हैं। ऐसे में भाजपा यहां भी ताकत हासिल करने की कोशिश जरूर करेगी।