असम, भारत का वो राज्‍य जहां पर चाय का उत्‍पादन सबसे ज्‍यादा होता है। मगर अब राज्‍य की बॉट लीफ फैक्‍ट्रीज (BLF) पर ताला लगने वाला है। ये फैक्‍ट्रीज, असम के कई जिलों में फैली हुई हैं। बताया जा रहा है कि टी बोर्ड की तरफ से बेहतरीन हरी चाय पत्तियों का उत्‍पादन न होने की वजह से यह कदम उठाने का फैसला फैक्‍ट्री की तरफ से किया गया है। फैक्‍ट्री की बिश्‍वनाथ जिले में स्थित यूनिट ने पहले ही उत्‍पादन बंद कर दिया है। इस कदम का असर छोटे चाय उत्‍पादकों पर पड़ने की आशंका है क्‍योंकि बीएलएफ की तरफ से ही इन्‍हें चाय की पत्तियों की आपूर्ति की जाती है।

24 जुलाई से ही बिश्‍वनाथ जिले में स्थित सभी 22 फैक्ट्रियों पर ताला पड़ा हुआ है। असम बॉट लीफ टी मैन्‍युफैक्‍चरर्स के प्रेसीडेंट चंद कुमार गोहेन की मानें तो उन्‍हें अच्‍छी क्‍वालिटी की टी-लीव्‍स नहीं मिल रही हैं। उन्‍होंने कहा कि चाय उत्‍पादकों को टी-बोर्ड की तरफ से अच्‍छी आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में बीएलएफ भी छोटे उत्‍पादकों को सही कीमत अदा करने में असमर्थ है। कई फैक्ट्रियां डिब्रूगढ़, सिवसागर और गोलाघाट में हैं। बताया जा रहा है कि यहां पर उत्‍पादन पर असर पड़ा है।

असम में करीब 2 लाख चाय के छोटे उत्‍पादक हैं और ये सालाना राज्‍य के 50 फीसदी उत्‍पादन में अपना योगदान देते हैं। साल 2020 में असम में 618.50 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्‍पादन हुआ था। इसमें से छोटे चाय उत्‍पादकों की तरफ से 285.19 मिलियन किलोग्राम और बड़े चाय उत्‍पादकों का 333.01 मिलियन किलोग्राम योगदान था। पिछले वर्ष लॉकडाउन के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर असम के ज्यादातर चाय बागानों में काम शुरू हो गया था। इसलिए लॉकडाउन के संकट से गुजर रहे असम के चाय उद्योग के लिए नई उम्मीद जागी थी। मगर इस नए मसले ने यहां के उत्‍पादकों को फिर से परेशान कर दिया है।

असम चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य माना जाता है। इस वजह से ये राज्य Tea City of India भी कहलाता है। असम एक ऐसा राज्य है, जहां लगभग 1/5 लोग चाय के क्षेत्र में काम करते हैं। आपको बता दें कि चीन के बाद असम ही दुनियाभर में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण चाय उत्पादक है। यहां की चाय कई देशों में निर्यात की जाती है। रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान समेत कई देशों में असम की चाय की अच्छी डिमांड है। आंकड़ों के मुताबिक, असम में हर साल 500 मिलियन किलोग्राम से अधिक चाय का उत्पादन होता है।

यहां की चाय में इस्तेमाल होने वाला विशेष इंग्रीडेंट पाया जाता है। साल 1930 में सर विलियम मैककेचर ने सीटीसी तरीके यानी cut, tear, curl को खोजा था। सीटीसी चाय की प्रोसेसिंग का एक तरीका है, जिसमें चाय की पत्तियां रोलर्स से गुजरती हैं। इन रोलर्स में तेज दांत होते हैं, जो पत्तियों को कुचलते हैं, और कर्ल करते हैं। ऐसा होने से वे छोटे, सख्त छर्रों में बदल जाते हैं, जो पैकिंग के लिए ठीक होते हैं।