वैसे देश में तंबाकू पर बैन कर दिया गया है लेकिन तंबाकू फिर भी देश में कई करोड़ों की कमाई करता है। कई बार पुलिस लाखों के तंबाकूओं को नष्ट काराती है लेकिन फिर भी लोग इसे बेचते है। इसी तरह से कंज्यूमर्स लीगल प्रोटेक्शन फोरम, असम ने मांग की है कि राज्य में सभी तंबाकू से संबंधित उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश को एक वर्ष के लिए बढ़ाने की मांग की है। ताकी लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का कोरोना काल में खिलवाड़ ना हो।

 


कंज्यूमर्स लीगल प्रोटेक्शन फोरम मंच के सदस्यों ने राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग की आयुक्त मोनालिसा गोस्वामी को तंबाकू से संबंधित उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध पर अपनी मांग बताते हुए एक ज्ञापन सौंपा है। जानकारी के लिए बता दें कि निषेधात्मक आदेश 22 नवंबर को समाप्त होगा, जिसे लीगल प्रोटेक्शन फोरम मंच एक साल के लिए बढ़ाने के लिए मांग कर रहा है।फोरम के सचिव अजॉय हजारिका ने कहा कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश को एक साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।

 


तंबाकू उत्पादों के सेवन से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को काफी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में तंबाकू की औसत खपत 48.2 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 28.6 प्रतिशत से लगभग दोगुना है। 41.7 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। असम में, धूम्रपान करने वाले तंबाकू उपयोगकर्ता धूम्रपान करने वालों की तुलना में तीन गुना अधिक हैं।