केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने असम में अगरबत्ती के लिए बांस की तीली बनाने वाली एक यूनिट का उद्घाटन किया। इस यूनिट को 10 करोड़ रुपए की लागत से लगाया गया है। इससे प्रत्यक्ष रूप से 350 लोगों को जबकि परोक्ष रूप से 300 लोगों को रोजगार मिलेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, मोदी सरकार ने चीन और वियतनाम से कच्ची अगरबत्ती के आयात पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही उसमें उपयोग होने वाली बांस की तीलों पर आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है। ऐसे में असम में अगरबत्ती के लिए बांस की तीलों का कारखाना लगाया जाना महत्वपूर्ण कदम है।

बयान के अनुसार, अगरबत्ती में उपयोग होने वाली बांस की तीलों के आयात के कारण देश के अगरबत्ती उद्योग को काफी नुकसान हो रहा था। इसी कारण दोनों देशों से आयात पर पाबंदी लगाने का निर्णय किया गया। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्रालय के बयान के अनुसार सरकार के विभिन्न प्रयासों से सैकड़ों बंद पड़ी अगरबत्ती इकाइयां पिछले डेढ़ साल में फिर चलने लगी हैं। इससे करीब 3 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

अगरबत्ती बनाने के अलावा, असम में बाजली जिले में ‘Keshari Bio Products LLP’ नाम की इकाई, बैम्बू वेस्टेज की एक बड़ी मात्रा का उपयोग बायो फ्यूल और विभिन्न अन्य उत्पादों को बनाने में करती है। गडकरी ने बयान में कहा कि असम में अगरबत्ती के लिए बांस की तीली बनाने का कारखाना लगने से स्थानीय अगरबत्ती उद्योग को मजबूती मिलेगी। इस क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की काफी क्षमता है। उन्होंने कहा, ‘आत्मानिर्भर भारत’ का यह सबसे उपयुक्त उदाहरण है, जिसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार और स्थायी आजीविका बनाना है।

वर्तमान में, भारत में अगरबत्ती की खपत औसतन 1,490 टन प्रतिदिन है, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन केवल 760 टन का उत्पादन होता है। इसलिए, मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर के परिणामस्वरूप कच्चे अगरबत्ती का भारी आयात हुआ। नतीजतन, कच्चे अगरबत्ती का आयात 2009 में सिर्फ 2 फीसदी से बढ़कर 2019 में 80 फीसदी हो गया।