असम के तिनसुकिया जिले के लईका और डोधिया के ग्रामीण पिछले 7 दिनों से विरोध कर रहे हैं और लगभग 1,480 परिवारों को तत्काल पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के लिए जिला प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए तिनसुकिया के डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के पास लेजाईहॉला बोरगुरी में राहत शिविर स्थापित किए हैं। लईका और डोधिया दो वन गाँव हैं जो ऊपरी असम के तिनसुकिया जिले के डिब्रू-साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान में आते हैं।


लईका और डोधिया पुनर्वास समिति के सदस्य एपियो टेड ने कहा कि हम पिछले 70 वर्षों से यहां रह रहे हैं। लेकिन हमें सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। लईका और डोधिया के लोगों के पुनर्वास के लिए, डिगबोई रेंज में ओगुरी में 320 हेक्टेयर जमीन सरकार द्वारा आवंटित की गई थी। लेकिन तिनसुकिया जिला प्रशासन अभी तक सरकार की घोषणा के अनुसार काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हमें आश्वासन दिया कि वे लोगों के पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं। लेकिन आश्वासन मिलना अभी बाकी है।

हम मानसून के दौरान बाढ़ और कटाव के प्रकोप का सामना करते हैं और लोगों को राहत शिविरों में रहना पड़ता है। हम पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सरकार के आश्वासन के अलावा हमें कुछ नहीं मिल रहा है। इन्होंने कहा कि हमें मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बहुत उम्मीदें हैं क्योंकि असम में भाजपा की सरकार बनने के बाद पुनर्वास कार्यक्रम के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अगर हमारी मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया जाता है, तो हम अपने आंदोलन को तेज करेंगे।