दुनिया में कई तरह के जानवर लुप्तप्राय हो चुके हैं और कई लुप्तप्राय होने की कगार पर हैं। इन लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए दुनिया के सभी वन विभाग कई तरह के अभियान चला रहे हैं। लेकिन लोग इन्हीं लुप्तप्राय प्रजातियों को चंद पैसों के लिए बेच रहे हैं और इनको मार कर कई तरह की वस्तुओं का निर्माण कर रहे हैं। इसी कड़ी में असम के अंदर भारत-भूटान सीमा पर एक ऑपरेशन के दौरान सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 37 बटालियन के जवानों ने एक टोके गीको को बचाया है।

यह प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि डारंग जिले के मंगलदई में मुख्यालय स्थित बटालियन के SSB जवान तेनकीबस्ती में नाका चेकिंग के दौरान छिपकली की लुप्तप्राय प्रजातियों टोके गीको को बचाने में सक्षम रहे। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक ऐसे जीवित टोके गेको की कीमत भारतीय तस्करी के बाजारों में कई लाख से भी ज्यादा है। लोगों की एक वर्ग द्वारा अनधिकृत जानकारी फैलाने के बाद यह महंगा हो जाता है।
जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले भी सितंबर में, भारत-भूटान सीमा के साथ असम के बक्सा जिले में नागरगुली पुलिस चौकी के तहत बोगामती क्षेत्र से एसएसबी सैनिकों द्वारा दो टोके गीको को बचाया गया था। गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए, मिलन चंद्र शिल के नेतृत्व में एसएसबी सैनिकों की एक टीम ने भारत-भूटान सीमा पर एक अभियान शुरू किया और जेकॉस को बचाया था।