कोरोना वायरस के लॉकडाउन ने वैसे तो सारे धंधे ठप कर दिए और लोगों को घरों में कैद कर दिया है। लेकिन इससे लोगों का हुनर जो बाहर निकल कर आया है वो वाकई काबिले तारीफ हैं। जिंदगी की भाग दौड़ में लोग अपनी हुनर भूल जाते हैं सिर्फ पैसे कमाने में लग जाते हैं लेकिन कोरोना ने लोगों को एक खास तरह से अपने हुनर को लोगों के सामने रखने का मौका दिया है। कभी कमल की जड़ों से मास्क बनाता है तो कोई बांस की लकड़ियों से खूबसूरत गहने।


इसी तरह से असम में उत्तम आसान और टिकाऊ, जैविक और शून्य कार्बन फुटप्रिंट्स से लखीमपुर जिले में ग्रामीण उद्यमियों द्वारा बांस पर किए गए कामों को देखकर सारी दुनिया हैरान है। बड़े बड़े डिजाइनर भी इनको सलाम कर रहे हैं। असम में मेसुनेटिंग बांस फ्यूजन का ब्रांड नाम, तालुकदार आभूषण, जटिल हस्तशिल्प-हथकरघा और फर्नीचर डिजाइन कर रहे हैं और अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेच रहे हैं।


इन्होंने बांस से बने उत्तम आभूषण सारी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। बांस से बने  झुमके, हार, उंगली के छल्ले, बाल बैंड, क्लिप, ब्रोच पिन, चूड़ियाँ, कंगन, बाजूबंद, पायल और अन्य फैशन के सामान जैसे आभूषण मेसुनेटिंग बांस फ्यूजन का ब्रांड बांस उद्योग में बनाए जा रहे हैं। इसमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित किया गया है, जिसके बाद कारीगरों को बाँस उत्पाद बनाने का अंशकालिक रोजगार दिया गया था इकाई।