कोरोनो वायरस के चलते हुए लॉकडाउन ने असम में रेशम उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसने अभी तक 100 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। राज्य के 20 हजार से ज्यादा बुनकरों और श्रमिकों को इस वक्त काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

बता दें कि असम में सिल्क्स गोल्डन मुगा, व्हाइट पैट और वार्म एरी किस्म के रेशम का उत्पादन किया जाता है। वहीं स्यालकुची को राज्य के रेशम उद्योग के केंद्र के रूप में जाना जाता है जो गुवाहाटी से 35 किमी पश्चिम में स्थित है। बता दें कि स्यालकुची को उच्च गुणवत्ता वाले रेशम के उत्पाद का केंद्र माना जाता है। हालांकि लॉकडाउन के चलते यहां के 200 से अधिक थोक व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

बता दें कि लॉकडाउन के चलते अभी असम के बाजार पूरी तरह खुले नहीं है। वहीं अन्य राज्यों से भी व्यापार पूरी तरह से बंद हो चुका है। ऐसे में यहां रेशम के व्यवसायी फिलहाल काम बंद कर चुके हैं। व्यवासियों को कहना है कि अप्रैल से मई के महीनों में बिक्री चरम पर होती है। दरअसल इस दौरान असमिया त्यौहार बिहू मनाया जाता है। ऐसे में बुनकर, श्रमिक, मालिक और रेशम उद्योग के व्यापारी हर साल इस मौसम का इंतजार करते हैं, लेकिन इस बार तालाबंदी के कारण वे अपने उत्पाद नहीं बेच पा रहे हैं। 

स्यालकुची क्षेत्र की महिला बुनकर अनुलता कलिता का कहना है कि कोरोना के बाद हुआ लॉकडाउन से कारोबार बंद हो चुका है। वे उम्मीद करती हैं कि जल्द ही बाजार खुले। कलिता का कहना है कि उनके जैसे कई बुनकरों की आर्थिक स्थिति अब काफी खराब हो चुकी है।