नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने असम पुलिस द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए सोमवार को कहा कि उसने एक मौजूदा विधायक को गिरफ्तार करके न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाई है बल्कि गिरफ्तारी की सूचना विधानसभा अध्यक्ष को नहीं देकर गुजरात के गौरव को भी खंडित किया है। मेवानी ने आज यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी गिरफ्तारी सुनियोजित थी और मोदी सरकार के इशारे पर असम पुलिस उन्हें गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करके ले गई थी। 

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उनका कहना था की उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि किस अपराध ने असम पुलिस गुजरात आकर उन्हें गिरफ्तार कर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ उनके साथ ही नहीं बल्कि दलितों के साथ गुजरात में लगातार अत्याचार हो रहे हैं। एक दलित महिला राज्य सरकार के मंत्री पर दुष्कर्म का आरोप लगाती है लेकिन उसकी आवाज नहीं सुनी जाती है। राज्य में अडाणी समूह के एक बंदरगाह से 175 लाख करोड़ रुपए की हेरोइन बरामद होती है लेकिन इस मामले में किसी से पूछताछ नहीं की जाती है। उनके निर्वाचन क्षेत्र में उनके कई कार्यकर्ताओं पर लगातार झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और जानबूझकर दलितों का उत्पीडऩ किया जा रहा है। 

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मेवानी ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है की यदि उनके कार्यकर्ताओं पर लगे झूठे मुकदमें वापस नहीं लिए गए, पिछले आठ साल में हुईं 22 परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामलों की जांच नहीं की गई और नशे के फंदे में फंसाए जा रहे देश के युवाओं को न्याय देने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो वह और उनके कार्यकर्ता एक जून से गुजरात में भाजपा सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर कर हल्ला बोलेंगे।