असम पुलिस ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) और ओएनजीसी पर प्रतिबंधित उल्फा (आई) हमला कर सकता है। इतना ही नहीं उसके अधिकारियों के संभावित अपहरण के बारे में सतर्क किया है। दो पीएसयू ऊर्जा कंपनियों ने सुरक्षा इनपुट को गंभीरता से लिया है। इसके बाद सीआईएसएफ और एआईएसएफ जैसीएजेंसियों के साथ बैठक की। 

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असम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उल्फा (आई) की ओर से इनके प्रतिष्ठानों पर अधिकारियों के अपहरण सहित संभावित हमलों पर ऑयल इंडिया के अधिकारियों को टेलीफोन पर सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान कई तेल रिंग पहुंच से दूर हो जाते हैं। ऐसे में उन पर हमलों का खतरा बढ़ जाता है। ओआईएल के प्रवक्ता त्रिदिव हजारिका ने दुलियाजान में अपने फील्ड मुख्यालय से बताया कि कंपनी को इस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस से कुछ खुफिया जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा, तुरंत एक आंतरिक बैठक बुलाई गई और इसकी अध्यक्षता रेजिडेंट मुख्य कार्यकारी प्रभारी ने की। इसमें सीआईएसएफ, एआईएसएफ ओआईएल सुरक्षा और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। हजारिका ने कहा कि बैठक में सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों पर कर्मचारियों और अधिकारियों को जागरूक करने का निर्णय लिया गया और इसके अनुसार कुछ कदम उठाए गए। ओएनजीसी के एक सूत्र ने कंपनी और उसके कर्मचारियों के खिलाफ उल्फा (आई) द्वारा संभावित गतिविधियों के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों से अलर्ट मिलने की पुष्टि की। 

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बता दें कि 21 अप्रैल 2021 को असम-नागालैंड सीमा पर शिवसागर जिले के लकवा तेल क्षेत्र से उल्फा (आई) के उग्रवादियों ने तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के तीन कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था। तीन दिन बाद नागालैंड के मोन जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास एक मुठभेड़ के बाद दो कर्मचारियों को बचाया गया, जबकि तीसरे को 31 दिनों के बाद 22 मई को म्यांमार में सीमा के पास उग्रवादियों ने रिहा कर दिया था। इससे पहले भी 21 दिसंबर 2020 को उग्रवादियों ने क्विप्पो ऑयल एंड गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के दो कर्मचारियों को का अपहरण कर लिया था और 20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी थी।