कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया परेशान है। बढ़ते मामलों के चलते सभी देशों के वैज्ञानिक साथ में चिकित्सा वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी बीच सामने आने वाली भ्रामक जानकारियां मुश्किल खड़ी कर रही हैं। चीन में गैंडे के सींग से कोरोना की दवा बनाए जाने के दावे की वजह से गैंडों की जान मुश्किल में पड़ गई है। इसी के मद्देनजर असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्य़ान में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस उद्यान में एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। इस खबर के बाद यहां अधिक सतर्कता बरती जा रही है।




नगांव जिले के जखलाबांधा पुलिस थाने के थाना प्रभारी निपू कलिता का कहना है कि मैं अफवाह के स्रोत के बारे में अवगत नहीं हूं। लेकिन एक बात तय है कि इस अफवाह से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर तस्करों का ध्यान और अधिक केंद्रित होगा। फिलहाल लॉकडाउन के चलते सड़कें वीरान हैं। ऐसे में तस्करों को अपना कार्य अंजाम देने में मदद मिलेगी। इसलिए हम दिन-रात उद्यान के आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त लगा रहे हैं।
गैंडे का एक सींग अवैध बाजार में पांच से चालीस लाख तक बिक जाता है। पिछले सालों में तस्करों ने इस उद्यान में अनेक गैड़ों की हत्या की है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ रमेश गोगोई का कहना है कि लॉकडाउन के चलते लोगों की आवाजाही कम होने से उद्यान में तस्करी का दबाव बढ़ गया है। तस्कर अक्सर कार्बी पहाड़ से आकर राष्ट्रीय राजमार्ग 37 को पार कर उद्यान में प्रविष्ट होते हैं। साधारण दिनों में राजमार्ग पर लोगों का आनजाना लगा रहता है तो वे आसानी से उद्यान में प्रवेश नहीं कर सकते। लेकिन लॉकडाउन के चलते वाहनों और सुरक्षाबलों की आवाजाही कमने से तस्कर उद्यान में प्रवेश कर गैंडों की हत्या कर सकते हैं।
गोगोई का कहना है कि गैंडों के सींगों की तस्करी का पूरा खेल ही अंधविश्वास पर चल रहा है।नई अफवाह के चलते हमने उद्यान में निगरानी व्यवस्था को और सशक्त किया है। अच्छी बात यह है कि इस साल अब तक एक भी गैंडे की हत्या नहीं हुई है।