असम की सबसे बड़ी परियोजना बताई जा रही धनसिरी सिंचाई परियोजना का निर्माण 46 वर्ष में भी पूरा नहीं हो पाने के कारण राज्य सरकार ने इसे बंद करने का निर्णय लिया है। विधानसभा को शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी गई। यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के विधायक गोबिंद चंद्र बसुमतारी के एक प्रश्न के उत्तर में सिंचाई मंत्री अशोक सिंघल ने बताया कि 15.83 करोड़ रुपये शुरुआती खर्च का अनुमान लगाया गया था, जो बढ़कर 567.05 करोड़ रुपये हो गया है और इस परियोजना पर 444.18 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

सिंघल ने बताया कि 77,230 हेक्टेयर सालाना सिंचाई क्षमता पैदा करने के लिए परियोजना का निर्माण 1975 में शुरू हुआ था, लेकिन ‘विभिन्न कारणों से परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो पाई।’ सिंघल ने कहा, ‘मौजूदा परियोजना पुनरुद्धार की स्थिति में नहीं है। पुरानी मशीनरी लगभग कबाड़ बन गई है। इसलिए, हमें नई परियोजना पर काम करना पड़ेगा। यह परियोजना इस वित्त वर्ष के अंत तक बंद हो जाएगी। अन्यथा, धनसिरी परियोजना में निर्माण और मरम्मत का काम कभी खत्म ही नहीं होगा।’

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने परियोजना पर विचार-विमर्श करने और एक नई परियोजना शुरु करने के लिए असम के बाहर के एक प्रतिष्ठित सलाहकार की सेवा लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अवधि में डिजाइन और मॉडल परीक्षण में देरी, कलकत्ता उच्च न्यायालय में दर्ज मामलों के कारण कई कानूनी बाधाएं, अरुणाचल प्रदेश और भूटान से अनुमति में देरी और लक्ष्य पूरा नहीं कर पाने के कारण ठेकेदार बदलने जैसे कई कारणों से परियोजना में देरी हुई।

मंत्री ने कहा, ‘‘1979 से 1985 तक असम आंदोलन ने परियोजना के काम में बाधा डाली। उसके बाद 1993 तक बोडो आंदोलन ने भी काम की प्रगति को धीमा किया। साथ ही, इस बात का भी उल्लेख किया जाना चाहिए कि उस समय क्षेत्र में उग्रवाद की समस्या व्याप्त थी जिसके कारण इसे पूरा करने में कठिनाई हुई।’’