असम सरकार ने कपड़ा क्षेत्र की कंपनियों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। राज्य सरकार ने उन्हें अनुकूल नीतियों एवं समर्थन का भरोसा दिया है। असम के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र मोहन पाटवारी ने कहा की सरकार की 'पूर्व में काम करो' नीति के आगे बढ़ने के साथ ही आठ करोड़ लोगों तक पहुंच को देखते हुए असम अब दक्षिणपूर्वी एशिया का बड़ा केन्द्र बन रहा है।

केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा इन्वेस्ट इंडिया के साथ मिलकर सोमवार को आयोजित वेबिनार 'विशेष निवेश मंच' में असम से भागीदारी करते हुये पाटोवरी ने कहा कि राज्य का बेहतर बुनियादी ढांचा उसे निवेश के लिये उपयुक्त स्थल बनाता है। यहां कपड़ा और परिधान कंपनियों के लिये निवेश का अनुकूल माहौल है। 

उन्होंने कहा, 'चौथी अखिल भारतीय हथकरघा गणना के मुताबिक असम में देश में सबसे ज्यादा करघे और बुनकर हैं। राज्य मं 10.9 लाख बुनकर परिवार और 10.19 लाख करघों के साथ कुटीर उद्योग लोगों को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है। राज्य में एक टैक्सटाइल पार्क है और ऐसा एक और पार्क स्थापित करने की दिशा में काम हो रहा है।'

असम के अलावा इस वेबिनार में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुये केन्द्र कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भारत में कपड़ा क्षेत्र के सदियों पुराने इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत में कपड़ों का बड़ा बाजार है, कच्चे माल की अच्छी उपलब्धता है और निवेशकों के अनुकूल नीतियां हैं। असम में हर साल 4,650 टन एरी सिल्क, 156.96 टन मुगा सिल्क और 59.50 टन मलबेरी सिल्क का उत्पादन हाता है। राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग आयुक्त एवं सचिव के के द्विवेदी ने यह बताया।