असम के सिलचर कस्बे में होम आइसोलेट किए गए 70 साल के एक बुजुर्ग कोरोना मरीज ने खुदकुशी कर ली। इससे असम में कोरोना मरीजों को होम आइसोलेट करने की नीति पर सवाल उठ रहे हैं। जिस मरीज को होम आइसोलेट किया जाए, उसके रहने की अलग व्यवस्था है या नहीं कम से कम तो यह देखा ही जाना चाहिए। 

खुदकुशी करने वाला बुजुर्ग व्यक्ति सिलचर के रांगीरखाड़ी इलाके में एक दुकान पर काम कर के अपना गुजारा करते थे। मंगलवार को उन्होंने अपने घर में खुदकुशी कर ली। वह अपनी बहन के साथ एक रूम के फ्लैट में रहते थे। उनकी मौत के बाद लोग जिला प्रशासन की बुजुर्गों को होम आइसोलेट करने की नीति पर सवाल उठा रहे हैं। जब उनकी देखभाल करने वाला कोई न हो और उनके पास अलग रहने की व्यवस्था की न हो तो उन्हें कैसे होम आइसोलेट किया जा सकता है। 

स्थानीय लोगों ने बताया कि बुजुर्ग द्वारा खुदकुशी का पता तब चला जब मंगलवार शाम करीब पौने पांच बजे उनकी बहन चीख चीख कर रोने लगी और मदद की मांग करने लगी। एक पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो देखा कि महिला के भाई ने खुदकुशी कर ली है। चूंकि वह कोरोना पॉजिटिव थे, इसलिए हम उनकी मदद नहीं कर सकते थे। इसीलिए पुलिस व स्वासथ्य विभाग को सूचित किया। 

मृत बुजुर्ग की बहन ने बताया कि उनके भाई बाहर आवाजाही पर लगाई गई पाबंदी व कमाई बंद होने के कारण निराश हो गए थे। गत शुक्रवार को वह पॉजिटिव पाए गए थे। उसके बाद से उन्हें होम आइसोलेट किया गया था। घटना के वक्त वह बाथरूम गई थी, जब वह लौटीं तो देखा कि भाई ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। ऐसे खतरनाक हालात में वह मुझे छोड़कर चले गए।