असम विधानसभा (Assam Legislative Assembly) ने गुरुवार को असम मवेशी संरक्षण अधिनियम (Assam Cattle Protection Act) में एक संशोधन पारित किया, जिसमें पुलिस को आरोपी के घर में प्रवेश करने और तलाशी लेने के साथ-साथ पिछले छह वर्षों में अवैध पशु व्यापार से अर्जित धन को जब्त करने का अधिकार दिया गया है। 

विधानसभा में गरमागरम बहस के बीच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि वह यह संदेश देना चाहते हैं कि अवैध पशु व्यापार से निपटने के लिए असम एक "कठिन राज्य" है। 20 दिसंबर को पेश किए गए विधेयक पर विपक्षी सदस्यों द्वारा लाई गई अधिकांश आपत्तियों को वापस ले लिया गया। हालांकि, निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई अपने रुख पर अड़े रहे। उन्होंने बिल कोअसंवैधानिक और सांप्रदायिक करार दिया।

विधानसभा ने 13 अगस्त को असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 पारित किया था, जिसमें हिंदू, जैन और सिख बहुसंख्यक या मंदिर या वैष्णव मठों के पांच किलोमीटर के दायरे में मवेशियों के वध और गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। 

अधिनियम में अब एक नई धारा सम्मिलित करने का प्रस्ताव पेश किया गया, जो कि एक जांच अधिकारी को अवैध पशु व्यापार से आय से पिछले छह वर्षों में अर्जित धन और उसकी चल या अचल संपत्तियों में प्रवेश करने, निरीक्षण करने, तलाशी लेने, जब्त करने और हिरासत में लेने का अधिकार देता है। 

आपको बता दें कि राज्य सरकार धार्मिक उद्देश्यों के लिए बछड़े, बछिया और गाय के अलावा अन्य मवेशियों के वध के लिए कुछ पूजा स्थलों या अवसरों को छूट देने के लिए अधिकृत थी। सरमा ने कहा, “मंदिरों में भैंस की बलि पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यह सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कभी भी चल सकता है। हालांकि, मंदिरों में गायों की बलि नहीं दी जाएगी और न ही कोई वध होगा।''

संशोधन के अनुसार, बांग्लादेश और भूटान की सीमा वाले 8 जिलों को छोड़कर राज्य सरकार को अवैध रूप से मवेशियों के परिवहन और कृषि और पशुपालन उद्देश्यों के लिए मवेशियों के अंतर-जिला परिवहन के दौरान जब्त किए गए वाहनों की नीलामी करने की अनुमति दी जाएगी। वर्तमान कानून सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए परमिट के बिना अंतर-जिला परिवहन को प्रतिबंधित करता है।

पहले बरामद मवेशियों को गौशालाओं में भेजा जाता था। उन्हें ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन पुलिस थानों में पड़े रहते थे।

विधेयक पड़ोसी बांग्लादेश में तस्करी को नियंत्रित करने के लिए असम के रास्ते गायों के परिवहन पर प्रतिबंध लगाता है। यह अन्य राज्यों से असम के माध्यम से राज्य के बाहर के स्थानों पर मवेशियों के परिवहन पर भी प्रतिबंध लगाता है। असम के भीतर किसी भी स्थान से राज्य के बाहर के स्थानों पर मवेशियों के परिवहन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

असम के बाहर के स्थानों से राज्य के भीतर किसी भी स्थान पर मवेशियों के परिवहन पर भी कानून द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, राज्य के भीतर एक स्थान से असम में स्थित दूसरे स्थान पर मवेशियों की आवाजाही भी प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, सक्षम अधिकारी वास्तविक कृषि या पशुपालन प्रयोजनों के लिए मवेशियों के परिवहन के लिए परमिट जारी कर सकते हैं।