रेलगाड़ी से लौट रहे प्रवासी कामगारों से किराया लेने को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच असम सरकार ने फैसला किया कि है वह सड़क मार्ग से आ रहे लोगों के लिए उनके स्थान से राज्य सीमा तक परिवहन की व्यवस्था नहीं करेगी। देश के अन्य हिस्सों से सड़क मार्ग से असम आ रहे लोगों के लिए तैयार मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) के मुताबिक असम की सीमा पर पहुंचने पर राज्य प्रशासन इन लोगों को घर पहुंचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था करेगा। 

एसओपी के मुताबिक अन्य राज्यों के सार्वजनिक वाहनों को असम की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, हल्के वाहनों को इससे छूट मिलेगी। उल्लेखनीय है कि सोमवार को राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हो गया जब कांग्रेस ने घर लौट रहे प्रवासी कामगारों की यात्रा पर आने वाले खर्च को वहन करने की घोषणा की। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि रेलवे पहले ही 85 प्रतिशत खर्च वहन कर रहा है और राज्यों से केवल 15 प्रतिशत राशि ली जा रही है। असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच  वितरित दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘अब इस घोषणा के बाद असम सरकार की ओर से राज्य की सीमा तक आने के लिए परिवहन की कोई व्यवस्था नहीं की जाएगी। लौटने वाले लोगों को मौजूद साधनों जैसे सार्वजनिक परिवहन या निजी कार/ टैक्सी का उपयोग यात्रा के लिए करना होगा।’’

 दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘ अन्य राज्य के सार्वजनिक परिवहन को असम की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, यह अपेक्षित शर्तों के अधीन है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव समीर सिन्हा द्वारा हस्ताक्षरित एसओपी के मुताबिक परिवहन विभाग और असम राज्य परिवहन निगम (एएसटीसी) अन्य राज्यों से सीमा तक आने वाले लोगों को जांच केंद्रों तक पहुंचाने के लिए सार्वजनिक वाहनों की व्यवस्था करेंगे और उसके बाद उन्हें संबंधित जिला मुख्यालय भेजा जाएगा। दस्तावेज में कहा गया है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में फंसे लोगों को राज्य में आने के सभी मार्गों से प्रवेश की अनुमति होगी लेकिन देश के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रवासी केवल कोकराझार के श्रीरामपुर और धुबरी जिले के सगलिया प्रवेश मार्ग से ही राज्य में दाखिल हो सकेंगे। एसओपी में कहा गया है कि पूर्वोत्तर को छोड़ देश के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रवासियों को पास के लिए आवेदन करना होगा जिसके आधार पर उन्हें असम में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले लोगों के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होगी। 

इसमें कहा गया, ‘‘असम सरकार जांच की उचित व्यवस्था के बाद देश के विभिन्न इलाकों में फंसे लोगों को चरणबद्ध तरीके से आने की अनुमति देगी।’’ हालांकि, जो लोग पहले ही श्रीरामपुर और सगलिया आ चुके हैं उन्हें पैदल सीमा में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी और निर्धारित जानकारी देने के बाद उन्हें पास जारी किया जाएगा। ऐसे लोगों को पास मिलने के बाद एएसटीसी की बसों से उनके जिले के क्षेत्रीय जांच कैम्प भेजा जाएगा। असम सरकार ने पहले ही फोन नंबर 7428159966 जारी किया है जिस पर 10 मई तक लोग मिस कॉल देकर लोग ऑनलाइन पास के लिए आवेदन कर सकते हैं। अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में आ रहे लोगों को देखते हुए सरकार ने जिला मुख्यालयों के अलावा कोकराझार, तेजपुर, जोरहाट, गुवाहाटी और सिलचर में क्षेत्रीय जांच केंद्र स्थापित करने का फैसला किया है। असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने हाल में कहा था कि असम के 20 लाख लोग दूसरे राज्यों में हैं और सरकार अगले एक महीने में दो से ढाई लाख लोगों के लौटने की उम्मीद कर रही है।