असम सरकार (Assam Government) ने गुवाहाटी हाईकोर्ट (Guwahati Government) को बताया है कि राज्य के दरांग जिले के ढालपुर चार से बेदखल किए गए लोग पीड़ित नहीं बल्कि अतिक्रमणकारी है। उनके द्वारा किया जा रहा दावा बिल्कुल गलत है कि वह और उनके पूर्वज बाढ़ और भूमि कटाव में खोई अपनी मूल भूमि से वहां गए थे।

दरअसल दशकों से लगभग 77, 000 ‘बीघा’ सरकारी भूमि पर कब्जा करके बसने वालों को बेदखल करने के लिए अभियान के दौरान 23 सितंबर को ढालपुर में पुलिस और परिवारों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान एक 12 वर्षीय बच्चे सहित दो नागरिकों की मौत हो गई और 8 पुलिसकर्मियों सहित 18 अन्य घायल हो गए थे।

बेदखली अभियान के दौरान हुई मौतों के बाद, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया कि बेदखल किए गए हाशिए के वर्गों से थे, जो बाढ़ और कटाव से बचने के लिए वर्षों पहले उन क्षेत्रों में चले गए थे। इसके जवाब में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

वहीं दरांग जिले के सिपाझार राजस्व मंडल के अंचल अधिकारी कमलजीत सरमा की तरफ से दाखिल किए गए सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि यह दावा सच नहीं है कि ढालपुर चार के निवासी और उनके पूर्वज विनाशकारी बाढ़ और भूमि कटाव के कारण अपने मूल निवास स्थान से पलायन करने के लिए मजबूर थे,  क्योंकि इसकी जानकारी राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है।

सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि कटाव और बाढ़ का कोई भी पीड़ित जो इस प्रक्रिया में भूमिहीन हो जाता है, उसे स्थानीय राजस्व प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होती है, जो इस तरह के रिकॉर्ड को बनाए रखते हुए उन्हें कटाव प्रभावित और भूमिहीन के रूप में प्रमाणित करता है।

हलफनामे में कहा गया है कि ढालपुर चार के रहने वालों और उनके पूर्वजों ने कभी भी अपने मूल स्थान से जारी किए गए ऐसे प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए हैं जहां से वे पलायन करने का दावा करते हैं। इसलिए बाढ़ और कटाव के कारण जबरन पलायन का दावा सही नहीं है।