गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी नौ दिनों तक असम की जेल में रहने के बाद अहमदाबाद पहुंचे और आरोप लगाया कि उन्हें असम सरकार के 'दिल्ली में राजनीतिक आकाओं' के इशारे पर कैद किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि अगर 22 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक की जांच नहीं हुई तो 1 जून को गुजरात बंद होगा।

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उन्होंने एक पुलिसकर्मी पर हमला करने के लिए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को "तुच्छ' करार देने के लिए न्यायपालिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि असम सरकार और पुलिस की कार्रवाई शर्मनाक है। मुझे नौ दिनों के लिए जेल में डाल दिया गया और प्रताड़िता किया गया, लेकिन मैंने शिकायत नहीं की। मेवामी ने मीडिया ने कहा कि यह दिल्ली में उनके राजनीतिक आकाओं के इशारे पर किया गया था। 

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वहीं गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक पुलिसकर्मी से मारपीट के मामले में गुजरात विधायक जिग्नेश मेवाणी के जमानत आदेश में असम पुलिस के खिलाफ बारपेटा जिला अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगा दी। हालांकि कोर्ट ने निर्दलीय विधायक की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।मेवाणी को जमानत देते हुए बारपेटा जिला अदालत ने शुक्रवार को विधायक के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस की खिंचाई की थी।