दुनिया में धर्म के नाम पर कई युद्ध हो चुके हैं और अब शायद दुनिया में तीसरी युद्ध धर्म पर ही हो सकता है। क्योंकि हर धर्म के लोग अपने धर्म को लेकर बहुत ही ज्यादा चिंता में है। इसी तरह से अपने अपने धर्म को बढ़ावा देने के लिए धर्म की स्कूल चला रहे हैं जैसे हिन्दूओं में संस्कृत की स्कूल और मुस्लिमों में मदरसे। इसी को खत्म करने के लिए असम सरकार राज्य में धर्मनिरपेक्ष स्कूली शिक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। असम राज्य मंत्रिमंडल ने इस महीने में होने वाले अगले विधानसभा सत्र में मदरसा और संस्कृत टोल अधिनियम में प्रावधानों को रद्द करने को मंजूरी दे दी है।


मदरसा और संस्कृत टोल अधिनियम में प्रावधानों का पालन अनिवार्य रूप से सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में धार्मिक शिक्षाओं का अंत होगा। विकास के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए, असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस कदम का 141 उच्च मदरसों, 542 मदरसों और 97 संस्कृत टोल पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि इस कदम से कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। और निजी मदरसों और संस्कृत के टोलों में धार्मिक शिक्षा प्रदान करना है। असम राज्य मदरसा बोर्ड 2021-22 में आयोजित होने वाले परीक्षा के परिणामों की घोषणा की तारीख से भंग हो जाएगा।


हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उनके सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकार माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, असम को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। उच्च मदरसा शब्द को हटाकर उच्च विद्यालयों और महाविद्यालयों के रूप में बदल दिया जाएगा। धर्मशास्त्र पाठ्यक्रम (कुरान पाठ्यक्रम) को भी 1 अप्रैल 2021 से रोक दिया जाएगा। SEBA 2021 में अंतिम उच्च-मदरसा परीक्षा आयोजित करेगा। इसलिए, 2022 से कोई उच्च मदरसा परीक्षा नहीं होगी। इसी तरह से संस्कृत की टोलियां कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय के तहत रखी जाएंगी और भारतीय इतिहास और संस्कृति पर डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम चलाएंगी।