असम में बनाए गए डिटेंशन सेंटर्स को अब नया नाम दिया गया है। राज्‍य सरकार ने जानकारी दी है कि विदेशियों के लिए बनाए गए इन सेंटर्स को अब ट्रांजिट कैंप के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में असम के गृह एवं राजनीतिक विभाग के प्रमुख सचिव नीरज वर्मा ने 17 अगस्‍त को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

असम सरकार की ओर से जारी किए गए इस नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि हिरासत में रखने के उद्देश्‍य से बनाए गए डिटेंशन सेंटर्स को अब ट्रांजिट कैंप के नाम से जाना जाएगा। यह 17 जून 2009 को जारी नोटिफिकेशन का आंशिक संशोधन है।

असम में दशकों से पूर्वी बंगाल (बाद में पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश) से प्रवासी आते रहे हैं। गोलपारा, कोकराझार, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर में जिला जेलों के अंदर दोषी विदेशियों और घोषित विदेशियों को रखने के लिए छह डिटेंशन सेंटर्स बनाए गए हैं। इन्हें राज्य सरकार द्वारा 2009 में अस्थायी रूप से अधिसूचित किया गया था।

एक नया डिटेंशन सेंटर पूरी तरह से अवैध रूप से आए विदेशियों को हिरासत में लेने के उद्देश्य से गुवाहाटी से लगभग 150 किलोमीटर दूर गोलपारा जिले के मटिया में निर्माणाधीन है। जुलाई में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने विधानसभा में बताया था कि छह केंद्रों में 181 बंदी हैं। 181 में से 61 घोषित विदेशी हैं और 120 दोषी विदेशी हैं।

इसका मतलब है कि वह विदेशी नागरिक जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करता है और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है। जबकि एक घोषित विदेशी वह होता है, जिसे पहले भारतीय नागरिक माना जाता था, लेकिन फिर विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के 10 मई, 2019 के आदेश के बाद इन डिटेंशन सेंटर में रखे गए लोगों की संख्या में काफी कमी आई। उसके उस आदेश में कहा गया था कि घोषित विदेशियों को कुछ शर्तों के तहत तीन साल की हिरासत के बाद रिहा किया जा सकता है। अप्रैल 2020 में एक और आदेश ने इन बंदियों को रखने की अवधि को घटाकर दो साल कर दिया। इन दो आदेशों का पालन करते हुए करीब 750 लोगों को रिहा किया गया है।