असम पुलिस भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक पूर्व डीआईजी पीके दत्ता को मंगलवार को भारत-नेपाल सीमा पर हिरासत में ले लिया गया है। एक पुलिस प्रवक्ता ने यह जानकारी दी है। पीके दत्ता घोटाले के सामने आने के बाद से ही फरार थे। प्रवक्ता ने कहा कि दत्ता को असम सीआईडी द्वारा जारी 'लुक आउट सर्कुलर' (LOC) के बाद सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में लिया। 

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) जीपी सिंह ने पीटीआई को बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर हिरासत में लेने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया है और असम पुलिस की एक टीम उन्हें राज्य में वापस ला रही है।'


पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि भाजपा नेता दीबान डेका और पूर्व डीआईजी पीके दत्ता घोटाले के सामने आने के बाद से ही फरार थे। भाजपा नेता दिबान डेका को पार्टी ने निष्कासित कर दिया था। डेका ने राज्य के बारपेटा जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, उन्हें एक अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था।

राज्य पुलिस ने आरोपियों की जानकारी देने वाले को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, जिससे उनकी गिरफ्तारी हो सके। पेपर लीक घोटाले के सिलसिले में अब तक 32 लोगों को पकड़ा गया है। अगर दत्ता को गिरफ्तार किया जाता है, तो इनकी संख्या बढ़कर 33 हो जाएगी।बता दें कि भाजपा नेता डेका ने 30 सितंबर की रात पथचारकुच्ची इलाके में आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के लिए उन्हें गुवाहाटी लाया गया। डेका को कामरूप के मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें गुवाहाटी नगर पुलिस की अपराध शाखा की हिरासत में पांच दिनों के लिए भेज दिया गया।भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई ने गिरफ्तारी के बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें निष्कासित कर दिया। डेका ने फेसबुक पर खुद की पहचान भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में बताई है और उन्होंने 2011 का असम विधानसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और वह 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ने की भी उम्मीद कर रहे थे।