असम में बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया है जिसको लेकर राज्य सरकार चिंता में आ गई है। लेकिन घबराने की कोई बात नहीं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की हरसंभव मदद करने का अश्वासन दिया है। राज्य में बाढ़ जनित घटनाओं में तीन और लोगों की मौत हो गई जिससे इस प्राकृतिक आपदा के कारण मरने वाले लोगों की संख्या 107 हो गई है। इनमें से बाढ़ के चलते 81 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, भूस्खलन की वजह से 26 की मौत गई है। इसी वजह से पीएम नरेंद्र मोदी ने सीएम सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बाढ़ के साथ ही कोरोना और बागजान तेल कुएं आग की जानकारी ली और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह फोन पर असम बाढ़, कोविड-19 और बागजान गैस कुएं में लगी आग के परिदृष्य को लेकर समकालीन स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने लोगों की स्थिति पर चिंता जताई और अपनी एकजुटता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने राज्य को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।'
असम में बाढ़ जनित घटनाओं में तीन और लोगों की मौत हो गई जिससे इस प्राकृतिक आपदा के कारण मरने वाले लोगों की संख्या 107 हो गई है। प्रदेश के 33 जिलों में से 26 में 27.64 लोग बाढ़ से प्रभावित है। यहां बाढ़ के कारण घर क्षतिग्रस्त हो गए, फसलें तबाह हो गईं और कई स्थानों पर सड़कें और पुल टूट गए।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बाढ़ संबंधी अपनी दैनिक रिपोर्ट में बताया कि दो व्यक्तियों की मौत बारपेटा में और एक व्यक्ति की मौत दक्षिण सालमारा जिले में हुई। कुल 107 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 26 की जान भूस्खलन की चपेट में आने के कारण गई।
इस बार बरसात के मौसम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 108 पशुओं की जान चली गई। इनमें 9 गैंडे, 4 जंगली भैंसे, 7 जंगली सुअर, 2 बारासिंगा और 82 हिरण शामिल हैं। मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने बताया कि बाढ़ प्रबंधन को लेकर कोई समस्या नहीं है क्योंकि बाढ़ एवं कोविड-19 के लिए सरकारी कर्मचारियों के अलग-अलग दलों को तैनात किया गया है।
असम में कोरोना से अब तक 53 की मौत हो चुकी है जबकि मरीजों की संख्या 22, 981 हो गई है। इनमें से 10,503 केस अकेले गुवाहाटी से है। वहीं बागजान गैस कुएं से 54 दिन से लगातार आग उगल रहा है। यहां 27 मई से रिसाव शुरू हुआ था जिसके बाद 9 जून को यहां विस्फोट के साथ आग लगी थी।