असम विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। दूसरे और तीसरे चरण में पार्टी पूरी तरह मुस्लिम मतदाताओं पर फोकस करेगी। पार्टी की कोशिश है कि गठबंधन पार्टियों को पूरा वोट एक-दूसरे को स्थानांतरित हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा सीट जीत सके। असम में अभी 79 सीट पर मतदान होना बाकी है।

दूसरे और तीसरे चरण में जिन सीट पर चुनाव होना है, उनमें से ज्यादातर पर हार-जीत का फैसला मुस्लिम मतदाता करते हैं। निचले असम में मुसलिंम मतदाताओं के बीच वोट का विभाजन रोकने के लिए कांग्रेस ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन किया है। क्योंकि, पिछले चुनाव में बिखराव की वजह से करीब दो दर्जन सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

कई मुस्लिम बहुल सीट पर एआईयूडीएफ के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अच्छी पकड़ है। वर्ष 2011 के चुनाव में मुस्लिम बहुल 53 सीट में से कांग्रेस ने 28 और एआईयूडीएफ ने 18 सीट जीती थी। पर 2016 के चुनाव में कांग्रेस को 18 और एआईयूडीएफ 12 सीट मिली। इसलिए, दोनों पार्टियां एक-दूसरे को वोट स्थानांतरित कराने में जुट गए हैं।

कांग्रेस, यूडीएफ और लेफ्ट पार्टियां अपना वोट एक-दूसरे को स्थानांतरित कराने में सफल रहते हैं, तो जीत की दहलीज तक पहुंचने में बहुत मुश्किल नहीं होगी। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को 41.5 फीसदी वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 31 फीसदी वोट मिले थे। बीएसएफ भाजपा से अलग होकर कांग्रेस गठबंधन में शामिल है, ऐसे में महागठबंधन को फायदा होगा।

वर्ष 2016 के चुनान में बीएसएफ को करीब चार फीसदी वोट मिला था। इस वोट को कांग्रेस, एआईयूडीएफ और वामपंथी पार्टियों के वोट में जोड़ लिया जाए, तो यह करीब 48 फीसदी होता है। वही, भाजपा गठबंधन का वोट प्रतिशत कम हो जाएगा। पर इसके कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम वोट को एकजुट रखते हुए एक-दूसरे के उम्मीदवारों को स्थानांतरित करना होगा।